बिलासपुर हाईकोर्ट भवन की बाहरी तस्वीर और कानूनी न्याय का प्रतीक
बिलासपुर हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार कानून के तहत जुर्माने की प्रक्रिया पर बड़ा आदेश जारी किया है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर विराम लगा दिया है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने नियुक्ति के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए सरकार को भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की हरी झंडी दे दी है।

क्या बीच में बदले गए नियम?

दरअसल, सरकार ने मार्च 2025 में जब विज्ञापन निकाला था, तब अनुभव की कोई शर्त नहीं थी। लेकिन मई में इंटरव्यू कॉल लेटर के दौरान 25 और 30 साल के अनुभव की नई शर्त जोड़ दी गई। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि बीच में नियम बदले गए। एक बड़ा आरोप यह भी लगा कि सर्च कमेटी में शामिल IAS अफसर अपने ही उन सीनियर अफसरों का इंटरव्यू ले रहे थे, जिनके नीचे वे कभी काम कर चुके हैं। 172 वैध आवेदकों में से इस शर्त की वजह से सिर्फ 51 लोग ही इंटरव्यू की रेस में बचे थे।

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हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सरकार के पक्ष को सही ठहराया है। कोर्ट ने साफ किया कि शॉर्टलिस्टिंग जायज है, इतने ज्यादा आवेदकों का इंटरव्यू लेना मुमकिन नहीं था, इसलिए अनुभव के आधार पर छंटनी करना गलत नहीं है। CIC का पद हाईकोर्ट जज के बराबर का होता है, इसलिए 25-30 साल का अनुभव मांगना पूरी तरह तर्कसंगत है। इसी के साथ ही इस मामले में 29 मई से लगी रोक अब हट चुकी है, जिससे नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है।

बता दें कि मुख्य सूचना आयुक्त का पद 11 नवंबर 2022 से खाली है। आयोग में फिलहाल सिर्फ एक सदस्य होने के कारण RTI की 10 हजार से ज्यादा अपीलें धूल फांक रही हैं। दरअसल, नई नियुक्तियों के बाद आम जनता को सूचना के अधिकार के तहत अपनी शिकायतों का समाधान जल्द मिल सकेगा। अब गेंद सरकार के पाले में है, सर्च कमेटी की सिफारिश पर राज्यपाल नियुक्ति करेंगे।

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जानें कब क्या हुआ

  • 4 मार्च 2025: विज्ञापन निकला।
  • 29 मई 2025: हाईकोर्ट ने प्रक्रिया पर स्टे लगाया।
  • 7 अगस्त 2025: सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्ते में फैसला सुनाने का निर्देश दिया।
  • 12 नवंबर 2025: हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं और रोक हटाई।