नई दिल्ली: दुनिया एक बार फिर महायुद्ध की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सीधे संघर्ष (US-Iran War) में बदल गया है। होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी और ईरान के पलटवार ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस टेंशन का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जहाँ ब्रेंट क्रूड देखते ही देखते 6% तक महंगा हो गया है।
शेयर बाजार में खून-खराबा और फिर तगड़ा पलटवार
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में मिडिल ईस्ट की इस आग का सीधा असर देखने को मिला। बाजार खुलते ही निवेशकों के हाथ-पांव फूल गए और सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में डूब गए। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुक्रवार की क्लोजिंग 78,493 के मुकाबले सीधे 78,203 के लेवल पर गिरकर खुला। एनएसई निफ्टी भी 23,353 की तुलना में गिरकर 24,241 के स्तर पर आ गया।
बाजी पलटी: गिरावट के बाद दिखी गजब की रिकवरी
शुरुआती झटके के बाद कुछ ही मिनटों में बाजी पलट गई। कच्चे तेल और जंग की आहट से उबरते हुए सेंसेक्स-निफ्टी ने तेज रिकवरी दिखाई। एक वक्त पर सेंसेक्स 200 अंकों से ज्यादा चढ़ गया और 78,733 के लेवल को छू लिया। निफ्टी भी संभलते हुए 24,420 के करीब जा पहुंचा। हालांकि, युद्ध की अनिश्चितता के कारण बाजार फिर से फिसलते हुए नजर आए और करीब 140 अंकों की गिरावट के साथ ट्रेड करने लगे।
इन दिग्गज शेयरों ने संभाला मोर्चा
दरअसल, बाजार को पूरी तरह धराशायी होने से बचाने के लिए कुछ बड़े शेयरों ने जान झोंक दी। SBI के शेयर में 2.10%, ICICI Bank में 2% और ट्रेंट (Trent) में 1.10% की तेजी दर्ज की गई। BHEL (3%), AU Bank (1.50%) और स्मॉलकैप में Radico Khetan 2.50% की बढ़त के साथ बाजार को सहारा देते दिखे।
आम आदमी की जेब पर असर
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट कच्चे तेल की सप्लाई का सबसे बड़ा रूट है। अगर अमेरिका की नाकाबंदी लंबे समय तक चली, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। फिलहाल निवेशक फूँक-फूँक कर कदम रख रहे हैं, क्योंकि मिडिल ईस्ट से आ रही खबरों ने गिफ्ट निफ्टी को भी बुरी तरह तोड़ दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में बाजार में और बड़ी बिकवाली दिख सकती है।



