रायगढ़। धरमजयगढ़ के पुरुंगा क्षेत्र में अडानी ग्रुप के स्वामित्व वाली मेसर्स अंबुजा सीमेंट और प्रस्तावित कोयला खदान के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। यहां पुरुंगा के मैदान में ग्रामीणों की एक विशाल सभा आयोजित की गई, जिसमें पुरुंगा के कई प्रमुख लोगों ने विरोध का ऐसा बिगुल फूका मानों पूरे सभा को नई जान मिल गई हो। ग्रामीणों ने कहा कि हम अपनी ज़मीन किसी कीमत पर नहीं देंगे, और ज़ब ज़मीन देना ही नहीं तो पैसे की बात ही मत करो।
रणनीति के साथ मैदान में उतरे ग्रामीण
इस सार्वजनिक सभा से पूर्व इलाके के प्रमुख लोगों और गांव के प्रबुद्ध नागरिकों के बीच एक बंद कमरे में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस दौरान कंपनी की विस्तारवादी नीतियों और खदान से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार की गई।

‘यह लड़ाई पीढ़ियों के भविष्य की है’
सभा में वक्ताओं ने विरोध करते हुए ग्रामीणों में नई ऊर्जा का संचार किया। सभी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और पहचान की है। हमें किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन को कंपनी के हाथों में नहीं सौंपना है। विकास के नाम पर विनाश का खेल अब पुरुंगा की धरती पर नहीं चलेगा। हम एकजुट होकर इस कंपनी को यहां से खदेड़ कर ही दम लेंगे।

कोयला खदान का पुरजोर विरोध
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने एक स्वर में अडानी ग्रुप मेसर्स अंबुजा सीमेंट की कोयला खदान परियोजना का विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में खनन गतिविधियों से जल, जंगल और जमीन पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। ग्रामीणों के इस उग्र रुख को देखते हुए क्षेत्र में गहमागहमी बढ़ गई है। पुरुंगा मैदान की इस सभा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सभा के अंत में ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करेंगे।



