टीआरपी डेस्क। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में इस वक्त विधानसभा चुनाव की गहमागहमी है, लेकिन इसी चुनावी शोर के बीच कृषि जगत से एक बेहद चौंकाने वाली खबर आई है। धान का कटोरा कहे जाने वाले बंगाल और तमिलनाडु को पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश अब देश का नंबर-1 चावल उत्पादक राज्य बन गया है। भारत सरकार के ‘उपज’ (UPAg) पोर्टल के ताजा आंकड़ों ने इस ऐतिहासिक फेरबदल पर मुहर लगा दी है।
कैसे टूटा रिकॉर्ड: यूपी की छप्परफाड़ पैदावार के पीछे के असल कारण
साल 2025 की सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कुल 1406 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश का हिस्सा 192 लाख टन रहा। दरअसल, इस बड़ी कामयाबी के पीछे प्रदेश का अनुकूल मौसम और बेहतर मानसून प्रबंधन रहा है। धान की खेती के लिए जरूरी गर्म और आर्द्र जलवायु के साथ-साथ यूपी के विशाल मैदानी इलाकों की उपजाऊ दोमट मिट्टी ने इस रिकॉर्ड उत्पादन में संजीवनी का काम किया। समय पर हुई बारिश ने सिंचाई की समस्याओं को खत्म कर फसल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
पायदानों का फेरबदल: तेलंगाना दूसरे और बंगाल तीसरे नंबर पर खिसका
चावल उत्पादन की इस रेस में अब बड़े उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल को पछाड़कर तेलंगाना अब 183 लाख टन के साथ दूसरे पायदान पर काबिज हो गया है, जबकि कभी शीर्ष पर रहने वाला बंगाल अब तीसरे स्थान पर आ चुका है। तमिलनाडु भी इस मुकाबले में काफी पीछे रह गया है। गौरतलब है कि भारतीय चावल का डंका आज पूरी दुनिया में बज रहा है और करीब 150 देशों की रसोई तक हमारे खेतों की उपज पहुंच रही है, जिसमें मिडिल ईस्ट के देश सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे हैं।


