टीआरपी डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के गहमागहमी के बीच चुनाव आयोग ने बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। आयोग ने निष्पक्षता और तटस्थता से समझौता करने वाले पुलिस अधिकारियों को कड़ा सबक सिखाते हुए डायमंड हार्बर पुलिस जिले के 5 सीनियर अफसरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। चुनावी मैदान में तैनात इन अधिकारियों पर ‘गंभीर कदाचार’ और पक्षपात करने के संगीन आरोप लगे हैं, जिसके बाद आयोग ने यह सख्त कदम उठाया है।
IPS समेत 5 अफसरों पर एक्शन: गृह मंत्रालय तक पहुंची रिपोर्ट
चुनाव आयोग ने न केवल इन अधिकारियों को निलंबित किया है, बल्कि मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इनके खिलाफ विभागीय जांच (अनुशासनात्मक कार्रवाई) शुरू करने के भी आदेश दिए हैं। इस कार्रवाई में सबसे बड़ा नाम डायमंड हार्बर के एडिशनल एसपी (IPS) संदीप गराई का है। आयोग ने उनके मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी विस्तृत रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। इसके अलावा एसडीपीओ सजल मंडल और तीन थानों के प्रभारियों मौसम चक्रवर्ती (डायमंड हार्बर), अजय बाग (फालता) और शुभेच्छा बाग (उस्ती) को भी सस्पेंशन का नोटिस थमा दिया गया है।
SP को कड़ी चेतावनी और आयोग का कड़ा संदेश
दरअसल यह पूरी कार्रवाई मुख्य निर्वाचन अधिकारी की 22 अप्रैल की उस गोपनीय रिपोर्ट के बाद हुई है, जिसमें अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं, जिले की पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. इशानी पाल को भी नहीं बख्शा गया है; उन्हें अपने मातहत अधिकारियों पर नियंत्रण न रख पाने के लिए कड़ी चेतावनी जारी की गई है। छत्तीसगढ़ से लेकर बंगाल तक, प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई ने हड़कंप मचा दिया है क्योंकि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘मैदानी सूत्रों’ की हर रिपोर्ट पर उसकी पैनी नजर है।


