टीआरपी डेस्क। दिल्ली और पंजाब की सियासत में सोमवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया। जब राज्यसभा सचिवालय ने आम आदमी पार्टी से बगावत करने वाले सभी 7 सांसदों को भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में मान्यता दे दी।

अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाने वाले राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत सात दिग्गज नेताओं का अब आधिकारिक तौर पर पाला बदलना आप के लिए किसी तगड़े झटके से कम नहीं है। इस फैसले के साथ ही उच्च सदन यानी राज्यसभा में भाजपा की ताकत बढ़ गई है और उसके सदस्यों की संख्या अब 113 पर पहुंच गई है।

संजय सिंह की दलीलें फेल, सचिवालय ने दी हरी झंडी

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने इस टूट को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। रविवार को ही आप सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को एक कड़ा पत्र लिखा था। संजय सिंह ने अपनी चिट्ठी में दलील दी थी कि इन सातों सांसदों का कदम सीधे तौर पर दल-बदल कानून का उल्लंघन है,

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इसलिए उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। हालांकि, राज्यसभा सचिवालय ने इन आपत्तियों को दरकिनार करते हुए सोमवार को अधिसूचना जारी कर दी, जिससे साफ हो गया कि अब ये सभी चेहरे तकनीकी और कानूनी रूप से भाजपा का हिस्सा बन चुके हैं।

राघव और हरभजन समेत इन बड़े चेहरों ने छोड़ा साथ

इस बगावत की पटकथा शुक्रवार को ही लिख दी गई थी जब राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ने का ऐलान किया था। इनके साथ पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता का नाम भी शामिल है।

आप ने इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने की चेतावनी दी है, लेकिन सचिवालय के इस नोटिफिकेशन ने पार्टी की मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली और पंजाब की राजनीति में इस बड़ी टूट का क्या असर पड़ता है।

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