रायपुर। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर किताबों की बाध्यता संबंधित आदेश को निरस्त करने की मांग की है। इस संगठन ने आगाह किया है कि पूर्व में हाई कोर्ट ने
पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा प्रकाशित किताबों को अनिवार्य रूप से पढ़ाने के तमाम आदेशों को निरस्त कर दिया है।
‘स्कूलों की स्वायत्तता पर हस्तक्षेप’
गौरतलब है कि पिछले दिनों मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर प्रदेश के स्कूलों में एनसीईआरटी और एससीईआरटी की किताबों से अध्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। एसोसिएशन ने इसे स्कूलों की स्वायत्तता पर हस्तक्षेप और एकपक्षीय बताया है
बता दें कि आरटीई प्रतिपूर्ति राशि न बढ़ाए जाने को लेकर एसोसिएशन पहले ही विभाग के साथ असहयोग करने की घोषणा कर चुका है। मुख्य सचिव के आदेश को निरस्त करने के लिए एसोसिएशन ने जिन बातों का हवाला दिया है, वे इस प्रकार हैं:
1. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से मान्यता प्राप्त (स्टेट बोर्ड) के निजी स्कूलों को किताबें इस सत्र में अत्यंत विलंब से दी गई। किताबें इनके टाइम टेबल अनुसार ही 25 जुलाई तक बांटी गई। डेढ़ महीने तक किताबों की अनुपलब्धता के कारण हमें उपलब्ध किताबें उपयोग करनी पड़ी।
2. सी.बी.एस.ई से मान्यता प्राप्त अशासकीय विद्यालय सी.बी.एस.ई की अधिसूचना दिनांक 12.08.2024 सर्कुलर नंबर 12/2024 का पालन करते हैं, इसलिए अलग से किसी आदेश से उन्हें बांधना नियमों के अनुरूप नहीं है।
3. उच्च न्यायालय विलासपुर ने छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका क्र. WPC 3957/2025 के आदेश दिनांक 29.07.25 में प्रदेश के अलग अलग जिला शिक्षा अधिकारीयों द्वारा सत्र 2025 2026 में पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा प्रकाशित किताबों को अनिवार्य रूप से पढ़ाने के तमाम आदेशों को निरस्त कर दिया है। उच्च न्यायालय आदेश के बाद किताबें की बाध्यता खत्म हो गई है।
4. आज तारीख तक बहुत सारी किताबें प्रकाशित एवं वितरित न होने के कारण भी स्कूल बाजार से उपलब्ध किताबों से पढ़ाई करवा रहे हैं. जैसे Class 5th (English Medium), की 1. Hindi- Chhattisgharhi evam Sanskrit, 2. English, 3. Environmental Studies तथा 8th (English medium) की sanskrit (Surbhi).
5. छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की किताबें कक्षा चौथी एवं पांचवी तथा सातवें एवं आठवीं का सिलेबस / किताबें पिछले 20 सालों से वही हैं। इन्हें समय अनुसार अपडेट नहीं किया गया है। निजी स्कूल गुणवत्ता के चलते इतने पुराने पाठ्यक्रम का संचालन करने से हिचकते है।
6. ऐसी बहुत सी किताबें हैं जो अशासकीय विद्यालय अपने स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अध्ययन कराते हैं जैसे EVS, Gk, Value education,, Computer, English grammar एवं हिंदी व्याकरण इन किसी भी पुस्तकों का छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम प्रकाशन नहीं करता है, इसके अलावा प्रदेश में लगभग सभी अशासकीय विद्यालयों में नर्सरी, कक्षा के जी 1 एवं के जी 2 संचालित है (6 वर्ष से पहले की कक्षाएं) इन कक्षाओं की कोई भी पुस्तक पाठ्य पुस्तक निगम प्रकाशित नहीं करता है। ऐसे में अशासकीय विद्यालयों की मजबूरी है कि वह बाजार में उपलब्ध किताबों से अध्यापन कराएं। इस बाबत पूर्व में भी हाईकोर्ट का एक निर्णय है। (WPC 2345 /2022 के निर्णय के प्रति संलग्न है).
एसोसिएशन ने मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि आपके द्वारा जारी आदेश निरस्त करने एवं पाठ्य पुस्तक के उपयोग बाबत प्रदेश में संचालित निजी स्कूलों के लिए एक स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करें।
बहरहाल RTE को लेकर निजी स्कूलों के असहयोग आंदोलन के चलते राज्य सरकार से हुई तनातनी के क्या परिणाम सामने आते हैं और सरकार किताबों को लेकर जारी आदेश वापस लेती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



