Tamil Nadu Government Formation: तमिलनाडु की सियासत में इस वक्त जो खेला चल रहा है, उसने बड़े-बड़े दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। चेन्नई से लेकर दिल्ली तक हलचल तेज है। खबर है कि सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) सरकार बनाने के बेहद करीब है, लेकिन असली सस्पेंस 10 विधायकों के उस जादुई आंकड़े पर फंसा है, जो बहुमत के लिए चाहिए। यहां पढ़ें पूरा समीकरण और कैसे भाजपा के एक दांव ने AIADMK के भीतर भूकंप ला दिया है।
विजय को चाहिए सिर्फ 10 का साथ
चेन्नई के सियासी गलियारों से जो छनकर आ रहा है, उसके मुताबिक थलापति विजय की TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। लेकिन सरकार बनाने के लिए 118 का आंकड़ा चाहिए। कांग्रेस के 5 विधायकों ने समर्थन का भरोसा तो दिया है, जिससे आंकड़ा 113 तक पहुंच गया है, फिर भी 5 विधायकों की कमी खली रही है। इसी बीच खबर आ रही है कि विजय ने आज अपने नवनिर्वाचित विधायकों की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है, जिसमें विधायक दल का नेता चुना जा सकता है।
AIADMK में बड़ी टूट के संकेत?
सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर ये है कि भाजपा इस बार बैकफुट पर रहकर फ्रंटफुट वाली बैटिंग कर रही है। भाजपा का सीधा लक्ष्य है तमिलनाडु की सत्ता से कांग्रेस और वामपंथियों को दूर रखना। इसके लिए भाजपा अपनी सहयोगी AIADMK पर दबाव बना रही है कि वो विजय की पार्टी को समर्थन दे।
मगर असली पेंच यहीं फंसा है। AIADMK के भीतर दो फाड़ हो चुके हैं। एक खेमा (लीमा रोज मार्टिन वाला) विजय के साथ जाने को तैयार है, जबकि दूसरा खेमा इसके सख्त खिलाफ है। चर्चा तो यहां तक है कि AIADMK के करीब 25 से 35 विधायक बगावत के मूड में हैं और वो विजय की सरकार को बाहर से समर्थन दे सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो तमिलनाडु में दशकों पुरानी द्रविड़ राजनीति का किला ढह जाएगा।
एआईएडीएमके पर उद्धव ठाकरे जैसा संकट!
सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि AIADMK को डर सता रहा है कि कहीं उनका हाल भी महाराष्ट्र की शिवसेना जैसा न हो जाए। पार्टी के दिग्गज नेता मान रहे हैं कि अगर विजय के साथ गठबंधन हुआ, तो पार्टी के कैडर में बिखराव आ सकता है। भाजपा चाहती है कि तमिलनाडु में एक ऐसी सरकार बने जो कांग्रेस मुक्त हो, और इसके लिए वो थलापति विजय को चांद ही चांदी वाला ऑफर दे रही है।
राज्यपाल का अगला कदम और विजय की रणनीति
फिलहाल सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं। विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा तो पेश किया है, लेकिन राज्यपाल ने बहुमत का पुख्ता सबूत मांगा है। सूत्रों का कहना है कि विजय की नजर अब वामपंथी दलों (CPI, CPM) और VCK के उन 6 विधायकों पर है जो निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।


