high court

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक, ताड़मेटला नरसंहार के सभी आरोपियों को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां हमलावरों की पहचान साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करने में विफल रही हैं।

जांच की खामियों पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह बेहद पीड़ादायक है कि इतनी बड़ी संख्या में जवानों की बर्बर हत्या के बावजूद जांच एजेंसियां असली हमलावरों की पहचान तक साबित नहीं कर सकीं। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट का फैसला न तो तर्कहीन था और न ही न्यायिक रूप से गलत, क्योंकि अभियोजन पक्ष कोई भी भरोसेमंद साक्ष्य पेश नहीं कर पाया।

See also  Corona in Chhattisgarh- 24 घंटे में 1172 नए पॉजिटिव,14 की मौत,30 हजार के करीब पहुंची एक्टिव मरीजों की संख्या

मामले में कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 2 की मौत हो चुकी है। इन पर हत्या, आपराधिक साजिश और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। हालांकि, 7 जनवरी 2013 को दंतेवाड़ा सेशन कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में इन्हें बरी कर दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी सही माना है।

मास्टरमाइंड का अंत

सुरक्षा एजेंसियां ताड़मेटला हमले का मुख्य सूत्रधार कुख्यात नक्सली कमांडर मड़ावी हिड़मा को मानती थीं। हिड़मा बस्तर में नक्सली हिंसा का पर्याय बन चुका था और उसके खिलाफ दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे। आखिरकार, 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के मारेडूमिल्ली जंगलों में एक बड़े खुफिया ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने हिड़मा और उसकी पत्नी सहित 6 नक्सलियों को ढेर कर दिया था।6 अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा के ताड़मेटला जंगलों में नक्सलियों ने CRPF की 62वीं बटालियन पर घात लगाकर भीषण हमला किया था।

See also  CG News : नक्सलियों ने एक बार फिर कायराना हरकत को दिया अंजाम, दो ग्रामीणों की बेरहमी से कर दी हत्या, इलाके में दहशत

इस हमले में 75 CRPF जवान और 1 राज्य पुलिस का जवान शहीद हुआ था। इस जघन्य कांड का मास्टरमाइंड कुख्यात नक्सली हिडमा था, जिसे नवंबर 2025 में सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। निचली अदालत ने 2013 में ही आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी सही माना है।