गरियाबंद। आज गरियाबंद जिले में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान बड़ा ही भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जिसने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को उजागर कर दिया। देवभोग विकासखंड के माड़ागांव में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समाज के परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना की मांग को लेकर अधिकारियों के सामने दंडवत होते नजर आए।

विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार) समुदाय से जुड़े एक परिवार ने आवास की मांग को लेकर जिला पंचायत सीईओ के सामने दंडवत होकर पैर पकड़ लिया और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलाने की गुहार लगाई।

सालों बाद भी नहीं मिला आवास योजना का लाभ

गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड के बरही गांव से पहुंचे इस परिवार ने बताया कि वे लंबे समय से आवास के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला है। मजबूरी में आज भी वे कच्चे और अस्थायी आशियाने में रहने को विवश हैं। इस कार्यक्रम के दौरान जैसे ही परिजनों ने अपनी स्थिति रखी, माहौल कुछ क्षण के लिए गंभीर हो गया। प्रशासनिक मंच पर दंडवत होकर की गई यह गुहार केवल एक भावुक दृश्य नहीं, बल्कि व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठता सीधा सवाल बन गई।

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अफसर के सामने लगाई गुहार

सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान जब जिला पंचायत सीईओ ग्रामीणों की समस्याएं सुन रहे थे, तभी कमार समाज के कई लोग अपनी मांग लेकर पहुंचे। कुछ महिलाएं और बुजुर्ग जमीन पर दंडवत होकर मदद की गुहार लगाने लगे, जबकि कुछ ने अधिकारियों के पैर पकड़कर अपनी समस्या बताई।

पात्र होने के बावजूद सूची में शामिल नहीं

इन ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार आवेदन दिए और पंचायत से लेकर जनपद स्तर तक अपनी समस्या रखी, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि पात्र होने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल नहीं किया गया।

“राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र” माने जाते हैं कमार समुदाय

कमार समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति के रूप में संवेदनशील और संरक्षण योग्य समुदाय माना जाता है। सरकार इनके संरक्षण और विकास के लिए विशेष योजनाएं संचालित करने का दावा करती रही है। ऐसे में इस समुदाय के लोगों को बुनियादी आवास के लिए अधिकारियों के सामने दंडवत होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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व्यवस्था की संवेदनशीलता पर उठे सवाल

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी इस दृश्य पर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी कई जरूरतमंद परिवार योजनाओं से वंचित हैं।लोगों का कहना है कि यदि सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों में भी गरीबों को अपनी बात मनवाने के लिए इस तरह गुहार लगानी पड़े, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।