टीआरपी डेस्क। केरलम चुनाव में कांग्रेस की बंपर जीत ने पार्टी दफ्तरों में जश्न तो ला दिया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा। तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है। कांग्रेस के दो बड़े ऑब्जर्वर अजय माकन और मुकुल वासनिक ने विधायकों के साथ वन-टू-वन बात कर ली है। अब गेंद मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के पाले में है। इसी बीच खबर ये भी है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दिल्ली बुलाकर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

केसी वेणुगोपाल: राहुल गांधी के खास और विधायकों की पसंद

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के 63 में से ज्यादातर विधायक संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के नाम पर मुहर लगा रहे हैं। विधायकों का कहना है कि वेणुगोपाल के पास दिल्ली का पावर भी है और संगठन चलाने का तजुर्बा भी। लेकिन यहां एक पेंच फंसा है। वेणुगोपाल अभी विधायक नहीं, बल्कि सांसद हैं। पार्टी ने पहले कहा था कि सांसदों को चुनाव नहीं लड़ाया जाएगा। अगर उन्हें सीएम बनाया जाता है, तो उपचुनाव का रिस्क लेना होगा। कांग्रेस 2004 का वो वाकया भूली नहीं है जब मंत्री बनने के बाद के मुरलीधरन उपचुनाव हार गए थे।

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सतीशन और चेन्निथला की दावेदारी ने फंसाया पेंच

वीडी सतीशन, जो पिछले पांच साल से विपक्ष के नेता के तौर पर पिनाराई विजयन से लोहा ले रहे थे, वो किसी भी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने हाईकमान को साफ कह दिया है कि उन्हें सीएम पद के अलावा और कुछ नहीं चाहिए। दूसरी तरफ सीनियर नेता रमेश चेन्निथला अपनी वफादारी का हवाला दे रहे हैं। उनका कहना है कि 2011 में उन्होंने ओमन चांडी के लिए अपना हक छोड़ा था, अब उनकी बारी है। चेन्निथला के लिए किसी जूनियर के अंडर काम करना सम्मान की बात बन गई है।

भूपेश बघेल को मिल सकती है दिल्ली में बड़ी कमान

केरलम के इस सियासी घमासान के बीच छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल तेज है। चर्चा है कि केसी वेणुगोपाल अगर केरल के मुख्यमंत्री बनते हैं, तो दिल्ली में संगठन महासचिव का पद खाली हो जाएगा। ऐसे में हाईकमान छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता भूपेश बघेल को दिल्ली बुला सकता है। बघेल का आक्रामक अंदाज और संगठन पर पकड़ उन्हें इस रेस में सबसे आगे खड़ा करती है।

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अब फैसला खड़गे के हाथ में

कांग्रेस में हमेशा से रिवाज रहा है कि विधायकों की राय के बाद अंतिम फैसला आलाकमान ही लेता है। 2021 में भी विधायकों ने चेन्निथला को चाहा था, लेकिन दिल्ली ने सतीशन को चुना। इस बार देखना होगा कि राहुल गांधी अपने भरोसेमंद साथी वेणुगोपाल को केरल भेजते हैं या फिर सतीशन-चेन्निथला में से किसी एक को चुनकर विवाद खत्म करते हैं।