टीआरपी। रायपुर नगर निगम में पानी टैंकरों के संचालन के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया पर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से केवल 6 खास फर्मों का सिंडिकेट बनाकर करोड़ों रुपये का बंदरबांट किया जा रहा है।
यह मामला सीधे तौर पर रायपुर के उन वार्डों से जुड़ा है जो गर्मी में पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। टेंडर में धांधली और जीपीएस सिस्टम न होने से जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, जिससे जलापूर्ति की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
टेंडर प्रक्रिया और सिंडिकेट का खेल
नेता प्रतिपक्ष ने साक्ष्यों के साथ बताया कि पिछले कई वर्षों से लगातार चुनिंदा 6 निविदाकर्ताओं को ही 10 जोनों में कार्य आवंटित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन सभी फर्मों के रेट और आवेदन की तारीखें एक समान कैसे हो सकती हैं। तिवारी ने उन फर्मों के नाम भी उजागर किए हैं जिनमें मेसर्स केशव प्रसाद पांडे, मेसर्स प्रज्ञा कंस्ट्रक्शन, मेसर्स परिमल कश्यप, मेसर्स अरविंद सिंह ठाकुर, मेसर्स प्रवीण दीक्षित और मेसर्स रफीक अहमद शामिल हैं।

भुगतान में करोड़ों का अंतर
आकाश तिवारी के अनुसार, वर्ष 2025 में टेंडर 1 करोड़ रुपये का था, लेकिन भुगतान 2 करोड़ 6 लाख रुपये का किया गया। इस वर्ष भी टेंडर की राशि भुगतान की तुलना में काफी कम रखी गई है, जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है। साथ ही, टैंकरों की निगरानी के लिए अब तक जीपीएस (GPS) सिस्टम नहीं लगाया गया है, जिससे टैंकरों के वास्तविक संचालन की जांच करना असंभव है।
मुख्य तथ्य
टेंडर सिंडिकेट: केवल 6 फर्मों को ही बार-बार मिल रहा है काम।
भुगतान में अंतर: पिछले वर्ष 1 करोड़ के टेंडर के मुकाबले 2 करोड़ 6 लाख का भुगतान हुआ।
तकनीकी खामी: टेंडर की अनिवार्य शर्त होने के बावजूद टैंकरों में GPS गायब।
मांग: पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई।
नेता प्रतिपक्ष की इस मांग के बाद अब गेंद नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार के पाले में है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों पर गाज गिर सकती है। आगामी निगम बैठकों में भी इस मुद्दे पर हंगामे के आसार हैं।




