छत्तीसगढ़ में खाद की किल्लत! आम आदमी पार्टी ने सरकार को घेरा

टीआरपी। आम आदमी पार्टी (AAP) छत्तीसगढ़ ने प्रदेश में गहराते खाद संकट और नई कृषि नीतियों को लेकर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजधानी रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप नेताओं ने खाद वितरण के नए नियमों को किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला षडयंत्र करार दिया।

छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है और वर्तमान में खरीफ सीजन की तैयारियां जोरों पर हैं। खाद की कमी और वितरण प्रणाली में जटिलता सीधे तौर पर लाखों किसानों की फसल और उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है।

मामले का विवरण
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय झा, प्रवक्ता जयदीप खनूजा, सचिव अनुषा जोसेफ़ और शिव शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि समितियों के माध्यम से खाद उपलब्ध न करा पाना सरकार की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 60:40 के अनुपात को बदलकर 70:30 करना किसानों को निजी व्यापारियों से महंगी खाद खरीदने पर मजबूर करने की एक चाल है।

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पार्टी के अनुसार, अचानक रासायनिक खाद के उपयोग को कम करने और नैनो खाद की अनिवार्यता थोपने से उत्पादन में भारी कमी आएगी। किसानों को अब खाद के लिए पंजीयन, टोकन और राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे खरीफ की बुवाई में देरी हो रही है। आप नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ये नीतियां वापस नहीं लीं, तो पार्टी प्रदेश भर में बड़ा आंदोलन करेगी।

मुख्य तथ्य
उर्वरक और नगद राशि का अनुपात बदलकर 30% खाद और 70% नगद किया गया है, जिससे समितियों से मिलने वाली खाद में 10% की कटौती हुई है।

आप ने मांग की है कि नैनो यूरिया की अनिवार्यता खत्म की जाए और जैविक खेती लागू करने से पहले विशेष आर्थिक सहायता पैकेज दिया जाए।

आम आदमी पार्टी की इस चेतावनी के बाद अब देखना होगा कि सरकार सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता और वितरण प्रणाली में क्या सुधार करती है। यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में किसानों का मुद्दा और गर्मा सकता है।

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