कवर्धा। शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये के गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कवर्धा ब्लॉक के तत्कालीन बीईओ संजय जायसवाल को निलंबित कर दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने यह कार्रवाई विभागीय जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद की है। इस मामले में 2 कर्मियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग में करीब 218 करोड़ रुपये के गबन और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से जांच चल रही थी। जांच के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं, जिसके बाद तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी संजय जायसवाल पर कार्रवाई की गई।
बड़ी राशि निकाली मगर कोई हिसाब–किताब नहीं
अधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच सरकारी खजाने से कुल 218,04,87,344 रुपये निकाले गए, लेकिन इतनी बड़ी राशि के व्यय का पूरा हिसाब-किताब उपलब्ध नहीं कराया गया। ऑडिट में यह भी पता चला कि इस अवधि के कैश बुक, कई महत्वपूर्ण वाउचर और व्यय संबंधी रिकॉर्ड गायब हैं।
ऑडिट टीम को कई दस्तावेज नहीं मिले
इस मामले में ऑडिट टीम को पूरा लेखा-जोखा गायब मिला। न कैशबुक, न भुगतान रजिस्टर, न बिल-वाउचर और न ही उपयोगिता प्रमाण पत्र है।
ई-कोष के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 के बीच 27.76 करोड़ रुपए निकाले गए। इसी तरह अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच 67.29 करोड़ रुपए, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच 73.37 करोड़ रुपए और अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 के बीच 49.62 करोड़ रुपए कुल मिलाकर 218 करोड़ से अधिक राशि आहरित हुई। लेकिन पैसा किस पर खर्च हुआ, किसे भुगतान किया गया और किस आधार पर निकासी हुई, इन सबका का हिसाब विभाग के पास नहीं है। इससे जुड़े कोई भी रिकॉर्ड नहीं मिले।

इस वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने के बाद तत्कालीन प्रभारी बीईओ संजय जायसवाल (मूल पद व्याख्याता एलबी) को निलंबित कर दिया गया है। वर्तमान में उनकी पदस्थापना शासकीय हाईस्कूल बैरख (बोड़ला) में थी। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय बीईओ कार्यालय बोड़ला तय किया गया है।
खुद को निर्दोष बताया BEO ने
पूर्व बीईओ संजय जायसवाल ने बताया कि उनका कार्यकाल अक्टूबर 2022 से सितंबर 2025 तक तीन वर्षों का ही रहा। इस दौरान कक्ष प्रभारी योगेंद्र कश्यप लेखा-जोखे को दुरुस्त नहीं किया। उन्हें मौखिक और लिखित दोनों तरीके से आवश्यक निर्देश दिए गए, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद उन्होंने दस्तावेजों का संधारण ठीक से नहीं किया। इसी लापरवाही के कारण कई वित्तीय अभिलेख अधूरे रह गए। कक्ष प्रभारी को नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। यहां तक कि उन्हें निलंबित करने के लिए विभाग प्रमुख को पत्र लिखा तब बाबू के खिलाफ जांच का जिम्मा यू आर चंद्राकर को सौंपा गया, मगर अब तक कोई भी जांच नहीं की गई।
पूर्व में 2 कर्मचारी हो चुके हैं निलंबित
इस वित्तीय अनियमितता के मामले में प्रशासन ने कार्यालय में पदस्थ रहे वर्ग–2 कर्मचारी माया कसार और योगेंद्र कश्यप को निलंबित कर दिया था। इनके ऊपर कार्य में लापरवाही और मनमानी के आरोप लगे थे।
कवर्धा के पूर्व BEO के निलंबन की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि मामले में आगे और अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है।



