नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और लगातार महंगे होते जा रहे आयात बिल को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने एक और बड़ा आर्थिक फैसला लिया है। सरकार ने कुछ खास तरह के सिल्वर बार (चांदी की ईंटों) के आयात पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की तरफ से जारी नए आदेश के मुताबिक, अब 99.9% शुद्धता वाले सिल्वर बार को ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर रिस्ट्रिक्टेड यानी प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है।
अब मनमर्जी से नहीं मंगा सकेंगे चांदी, चाहिए होगा लाइसेंस
वाणिज्य मंत्रालय की इस संशोधित नीति के बाद अब देश में चांदी का खुलेआम आयात बंद हो गया है। शनिवार से लागू हुए नए नियमों के तहत अब किसी भी व्यापारी या कंपनी को बाहर से चांदी मंगाने के लिए पहले सरकार से खास मंजूरी लेनी होगी या फिर बकायदा इंपोर्ट लाइसेंस दिखाना होगा। सरकार ने दो तरह के एचएस (HS) कोड वाली चांदी की छड़ों पर यह नियम लागू किया है, जिसमें बुलियन-ग्रेड वाली सबसे शुद्ध चांदी भी शामिल है।
क्यों लिया गया यह फैसला? 157% बढ़ गया था आयात
आखिर सरकार को अचानक चांदी के आयात पर इतनी सख्ती क्यों बरतनी पड़ी? दरअसल, आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने अप्रैल में सालाना आधार पर चांदी के आयात में करीब 157 फीसदी की भारी बढ़ोतरी देखी गई थी। देश से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जा रही थी। हाल ही में सरकार ने सोने और चांदी पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) को भी 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया था। सरकार का मकसद साफ है कि चांदी और सोने जैसी गैर-जरूरी चीजों के आयात को रोका जाए, ताकि ईंधन (ऊर्जा) और खाद (उर्वरक) जैसी बेहद जरूरी चीजों के लिए देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाया जा सके।
सोने और प्लैटिनम पर भी कड़े हुए नियम
सिर्फ चांदी ही नहीं, सरकार ने सोने के आयात से जुड़े ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ नियमों को भी अब काफी सख्त कर दिया है। पहले इस स्कीम के तहत सोना मंगाने की कोई सीमा तय नहीं थी, लेकिन अब इसकी कड़ी निगरानी होगी। आपको बता दें कि पश्चिम एशिया संकट के चलते इंपोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा था। इसी वजह से सरकार ने सोने-चांदी पर ड्यूटी 15% और प्लैटिनम पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दिया है। इसके साथ ही सोने-चांदी के सिक्कों और डोरे पर भी टैक्स के नियम बदल दिए गए हैं।



