कांडला/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भयंकर युद्ध और तनाव के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग के चलते जहां पेट्रोल-डीजल और सीएनजी-एलपीजी के दाम बढ़ने का खतरा मंडरा रहा था, वहीं भारतीय सूझबूझ से रसोई गैस का एक विशालकाय जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया है। कतर से चला एलपीजी टैंकर सिमी रविवार सुबह गुजरात के कांडला पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच चुका है।
खतरे के रूट होर्मुज स्ट्रेट को पार कर भारत पहुंचे दो जहाज
आपको बता दें कि इस समय समुद्री व्यापार के लिए सबसे खतरनाक माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट 0(Strait of Hormuz) को पार कर दो बड़े जहाज भारत की तरफ बढ़े थे। इनमें से पहला पोत सिमीआज सुबह गुजरात आ गया। यह जहाज कतर के रास लफान टर्मिनल से 19,965 टन रसोई गैस लेकर निकला था। इस जहाज पर 21 क्रू मेंबर्स सवार हैं।
वहीं दूसरा वियतनामी पोत एनवी सनशाइन यूएई से 46,427 टन एलपीजी लेकर निकला है। उसने भी गुरुवार को इस खतरनाक समुद्री रास्ते को पार कर लिया है। उम्मीद है कि यह जहाज 18 मई तक न्यू मंगलुरु पोर्ट पहुंच जाएगा। इन दोनों जहाजों में मौजूद कुल 66,392 मीट्रिक टन रसोई गैस इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) की है।
तनाव के बीच मंत्रालय की पैनी नजर, अब तक निकले 13 जहाज
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि युद्ध के हालातों के बावजूद दोनों जहाजों ने क्रमशः 13 और 14 मई को होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार किया। इस रूट पर ईरान का दबदबा होने के कारण जहाजों की आवाजाही बेहद प्रभावित हुई है। लेकिन भारत की बेहतरीन कूटनीति के चलते मार्च से लेकर अब तक 12 एलपीजी टैंकर और एक कच्चे तेल के टैंकर सहित कुल 13 भारतीय जहाज सुरक्षित निकाले जा चुके हैं।
12 पोत अब भी खाड़ी में फंसे, सुरक्षित लाने की कवायद जारी
युद्ध के बीच कतर से गुजरात पहुंचा 19,000 टन एलपीजी लेकर आ रहा ‘सिमी’ जहाज, रसोई गैस का संकट टलाभले ही दो जहाजों का भारत आना बड़ी कामयाबी है, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में अभी भी भारत के करीब 12 जहाज फंसे हुए हैं। इसके साथ ही भारत के लिए माल लेकर आ रहे कई विदेशी जहाज भी वहां अटके हैं। सरकार इन जहाजों और उनके क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए है। राहत की बात यह है कि इस खेप के भारत पहुंचने से देश में रसोई गैस की किल्लत और महंगाई का डर फिलहाल टल गया है।



