टीआरपी डेस्क। Raigarh Tamnar Coal Mine: रायगढ़ जिले के तमनार इलाके में इस वक्त भारी तनाव का माहौल है। गारे पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान परियोजना को लेकर 19 मई को होने वाली जनसुनवाई से पहले ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। एसईसीएल (SECL) और अडानी ग्रुप की इस साझा परियोजना का विरोध इतना बढ़ गया है कि तमनार चौक से लेकर पेलमा गांव तक पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। लोग अपनी जमीन और आजीविका बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।

स्थानीय आदिवासियों का आरोप है कि अडानी ग्रुप के लोग उन्हें चुप कराने के लिए गांवों में घूम-घूमकर सामान बांट रहे हैं। लोग अपनी जमीन और जंगल बचाने के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। तमनार चौक से लेकर पेलमा तक हर तरफ बस इसी की चर्चा है।

362 हेक्टेयर जंगल, 9 लाख पेड़ों की बलि की तैयारी

इस पूरे गुस्से के पीछे पर्यावरण को होने वाला बड़ा नुकसान है। पेलमा के आदिवासियों का कहना है कि इस ओपन-कास्ट कोयला खदान के चक्कर में करीब 362 हेक्टेयर का हरा-भरा जंगल साफ कर दिया जाएगा।

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पेलमा के स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस ओपन-कास्ट कोयला खदान को शुरू करने के लिए इलाके के करीब 9 लाख से अधिक पेड़ काटे जाएंगे।

इससे पूरा जंगल तबाह हो जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि जल, जंगल और जमीन ही उनकी जिंदगी है और वे इसे किसी भी कीमत पर उद्योगपतियों के हाथ में नहीं सौंपेंगे। तमनार के एक बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया, अगर जंगल ही नहीं रहेगा, तो हम आदिवासी कहां जाएंगे? हमारी खेती और रोजी-रोटी सब छिन जाएगी।

पेटी, कुर्सी और छाता देकर खरीदने की कोशिश?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब जनसुनवाई से ठीक पहले कुछ लोग गाड़ियों में भरकर सामान लेकर गांवों में पहुंचे। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि अडानी के लोग उन्हें लालच देने के लिए पेटी, कुर्सी, दरी और छाता जैसी चीजें बांट रहे हैं।

जैसे ही यह बात फैली, युवाओं और महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने सामान बांटने आए लोगों को जमकर लताड़ा और उन्हें गांव से खदेड़ दिया। सोशल मीडिया पर भी इसके वीडियो वायरल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कंपनी उन्हें चंद सामानों के बदले चुप कराना चाहती है, लेकिन वे इसके झांसे में बिल्कुल नहीं आएंगे।

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पुराना है विवादों का इतिहास: दिसंबर 2025 में हुई थी हिंसा

यह कोई नया विवाद नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें काफी पुरानी हैं। इस साल 19 मई की इस तारीख से पहले, दिसंबर 2025 में भी इसी गारे पेलमा कोयला खदान को लेकर भीषण हिंसक झड़पें हो चुकी हैं।

उस वक्त पुलिस और ग्रामीणों के बीच जमकर टकराव हुआ था। भारी जनविरोध और कानून व्यवस्था बिगड़ने के डर से प्रशासन को पहले भी जनसुनवाई निरस्त करनी पड़ी थी। अब दोबारा उसी प्रक्रिया को शुरू करने से पुराना गुस्सा फिर से भड़क उठा है।

अडानी को लाभ और राजनीतिक सरगर्मी

इस पूरी कोयला डील को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस और स्थानीय आदिवासी संगठन सरकार पर हमलावर हैं। वहीं इस मामले में कांग्रेस का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर यह पूरी डील अडानी ग्रुप को फायदा पहुंचाने के लिए की गई है।

वहीं तमनार से लगे पेलमा के आदिवासी समुदाय ने साफ कर दिया है कि वे अपनी एक इंच जमीन भी नहीं देंगे। स्थानीय प्रशासन स्थिति को संभालने के लिए लगातार बैठकें कर रहा है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक ग्रामीण 19 मई को होने वाली जनसुनवाई का पूरी ताकत से बहिष्कार करने की तैयारी में हैं।

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