टीआरपी। रायपुर नगर निगम के चार प्रमुख वार्डों के करीब 1300 से 1500 घरों के निवासी बेघर होने के डर से सोमवार को नगर निगम मुख्यालय स्थित नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी के कक्ष पहुंचे। कैनाल रोड 2.0 योजना के नाम पर नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा अचानक शुरू किए गए घरों के सर्वे और नापजोख से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश और भय का माहौल बना हुआ है।
रायपुर के इन चार वार्डों में रहने वाले अधिकांश मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार हैं, जो पीढ़ियों से यहां बस रहे हैं। बिना किसी स्पष्ट पुनर्वास नीति या संतोषजनक जवाब के घरों के अंदर घुसकर की जा रही इस नापजोख से हजारों लोगों के आशियाने और रोजगार पर सीधा संकट खड़ा हो गया है, जिससे शहर के एक बड़े हिस्से में जन-आक्रोश भड़क रहा है।
कैनाल रोड 2.0 के नाम पर घरों में घुसकर हो रहा सर्वे
पीड़ित नागरिकों ने नेता प्रतिपक्ष को बताया कि शहीद पंकज विक्रम वार्ड (वार्ड नंबर 58), मोरेश्वर राव गद्दे वार्ड (वार्ड नंबर 59), चंद्रशेखर आजाद वार्ड (वार्ड नंबर 60) और श्यामाप्रसाद मुखर्जी वार्ड (वार्ड नंबर 61) में नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी लगातार घरों की चौड़ाई और गहराई नाप रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह नापजोख कैनाल रोड 2.0 योजना के तहत रोड चौड़ीकरण के लिए की जा रही है, और लोगों को अपने घरों के दस्तावेज लेकर दफ्तर आने का आदेश दिया जा रहा है।
ग्रामीणों और वार्ड वासियों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर महापौर से भी मिल चुके हैं, लेकिन वहां से कोई संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं मिला। इस अनिश्चितता के कारण लोगों का काम-धंधा बंद हो गया है। जनता की इस गंभीर समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने पीड़ितों को ढांढस बंधाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि कोई भी बेघर नहीं होगा। जनता के आशियाने बचाने के लिए नगर निगम से लेकर सड़क तक जो भी लड़ाई लड़नी पड़ेगी, हम पूरी ताकत से लड़ेंगे।”
प्रभावित आबादी: सर्वे की वजह से चार वार्डों के लगभग 1300 से 1500 परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है।
प्रभावित क्षेत्र: रायपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 58, 59, 60 और 61 के अंतर्गत आने वाले रहवासी इलाके।
विवाद का कारण: कैनाल रोड 2.0 योजना के तहत बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्ट गाइडलाइन के घरों के भीतर तक की जा रही नापजोख।
नेता प्रतिपक्ष के इस आश्वासन के बाद अब यह मामला राजनीतिक रूप से तूल पकड़ सकता है। आने वाले दिनों में बीजेपी पार्षद दल इस सर्वे के विरोध में नगर निगम कमिश्नर और महापौर का घेराव कर सकता है, जिससे नगर निगम प्रशासन को इस योजना पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।



