बिलासपुर। बिलासपुर एक ऐसा जिला है जहां एक नहीं दो–दो मंत्री हैं। एक राज्य में तो दूसरे केंद्र में हैं। बावजूद इसके इस जिले में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। इन दिनों जिले के 2 ब्लॉक में घटिया स्तर के सड़क निर्माण की खबरें सामने आ रही हैं। आम लोगों द्वारा इन सड़कों की गुणवत्ता का वीडियो वायरल किए जाने के बाद अब ये मामले रायपुर तक पहुंच गए हैं, और अफसरों को इन सड़कों की जांच के आदेश दिए गए हैं।
इन दिनों प्रदेश भर से घटिया स्तर की सड़कों के निर्माण की खबरें आ रही हैं। पिछले दिनों सरगुजा जिले में ग्रामीण इलाके में बनी एक सड़क अगले ही दिन उखाड़ने की खबर सामने आई थी। इसी कड़ी में बिलासपुर जिले में भी सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। इनमें पहला मामला मस्तूरी ब्लॉक का है, जहां अमाकोनी से बहतरा तक करीब 1.40 करोड़ रुपये से बनी डामरीकृत सड़क निर्माण पूरा होने के महज सात से दस दिन के भीतर ही उखड़ने लगी है। हालत यह है कि सड़क की डामर परत हाथ से ही पापड़ की तरह निकल रही है। मामले का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद अब यह मुद्दा रायपुर तक पहुंच गया है।
ग्रामीण बता रहे हैं कि आमगांव ग्राम पंचायत के आश्रित गांव आमाकोनी से बहतरा तक लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क हाल ही में बनाई गई थी। लेकिन शुरुआती दिनों में ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए। ग्रामीणों ने सड़क की परत हाथ से उखाड़ते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में साझा किया, जिसके बाद निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और भारी लापरवाही के आरोप लगे।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मुरूम और मजबूत बेस सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। उनकी मानें तो गुणवत्ता युक्त सामग्री की जगह साधारण मिट्टी डालकर काम पूरा कर दिया गया, जिसके कारण डामर की ऊपरी परत सड़क से चिपक ही नहीं पाई और कुछ दिनों में उखड़ने लगी। कई हिस्सों में गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और सड़क कमजोर हो चुकी है।
सचिव ने जांच के दिए आदेश
इस मामले ने तूल पकड़ा तो लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने बिलासपुर के मुख्य अभियंता को तत्काल जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय अधिकारी मामले को दबाने और ठेकेदार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
मामले को हल्का बताने का प्रयास, ग्रामीण गुस्से में
वायरल वीडियो के बाद पीडब्ल्यूडी के एसडीओ टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने इसे छोटी-मोटी गड़बड़ी बताकर मामला हल्का करने का प्रयास किया। बाद में सचिव स्तर से हस्तक्षेप होने पर जब सैंपल लेने टीम पहुंची तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने जांच में लीपापोती का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध किया। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
एक महीने में उखड़ी गौरव पथ
उधर तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत नेवरा में मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के तहत बनाई गई 36 लाख रुपये की सड़क महज एक महीने के भीतर ही बदहाल हो गई है। वरिष्ठ विधायक धर्मजीत सिंह के इलाके में हुए इस निर्माण कार्य ने सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। सड़क की गिट्टियां उखड़ने लगी हैं और ग्रामीण अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में साफ तौर पर बताया है कि 450 मीटर लंबी इस सड़क के निर्माण में शुरुआत से ही गुणवत्ता को दरकिनार किया गया। ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण सड़क में बेहद दोयम दर्जे की निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया। आलम यह है कि सड़क पर दुपहिया या चार पहिया वाहन के गुजरते ही उसकी ऊपरी परत टूटकर बिखर रही है। ग्रामीणों को इस बात की गहरी चिंता सता रही है कि आने वाले दिनों में जब मानसून दस्तक देगा, तब इस सड़क का क्या हाल होगा। उन्हें आशंका है कि बारिश के पानी में यह सड़क पूरी तरह से बह जाएगी और वहां सिर्फ बड़े-बड़े गड्ढे बचेंगे, जो राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
निर्माण में पारदर्शिता का अभाव
निर्माण कार्य में पारदर्शिता की भी जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी निर्माण स्थल पर एक जानकारी बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है जिसमें लागत, कार्य एजेंसी और तकनीकी बातों का पूरा ब्यौरा हो। लेकिन नेवरा में ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया ताकि लोगों को काम की जानकारी न मिल सके। इसके अलावा, सड़क के दोनों किनारों पर पानी निकासी के लिए नाली बननी थी, वह भी नहीं बनाई गई। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर काम का मुआयना किए बिना ही आंख मूंदकर ठेकेदार का बिल पास कर दिया और उसे भुगतान भी कर दिया गया।

ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
इस बड़ी गड़बड़ी के खिलाफ संकल्प जन कल्याण समाज सेवा संघ छत्तीसगढ़ के कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष बिहारी सिंह टोडर की अगुवाई में नेवरा के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में कड़े शब्दों में मांग की है कि इस खराब सड़क को पूरी तरह से उखाड़ा जाए और तय स्टीमेट के अनुसार इसका दोबारा मजबूती से निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने यह भी साफ कर दिया है कि मामले की जांच केवल बंद कमरों में कागजों पर नहीं होनी चाहिए बल्कि शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में मौके पर जाकर होनी चाहिए ताकि लीपापोती न हो सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जिन अधिकारियों ने बिना गुणवत्ता जांचे काम को स्वीकृति दी है उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। साथ ही निर्माण एजेंसी और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उनका पंजीयन रद्द किया जाए। इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की भी पुरजोर मांग उठी है। प्रशासन को जगाने के लिए ग्रामीणों ने अपनी इस शिकायत की कॉपी मुख्यमंत्री, संबंधित विभागीय मंत्री, तखतपुर विधायक और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी भेज दी है।



