बिलासपुर। DMF (जिला खनिज न्यास) से जुड़े कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए किए जाते हैं, लेकिन उनका असर पूरे समाज और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे मामलों में जमानत याचिकाओं को सामान्य मामलों की तरह नहीं देखा जा सकता।

बिचौलिया और कमीशन एजेंट की रही भूमिका

रायपुर निवासी सतपाल सिंह छाबड़ा को एसीबी और ईओडब्ल्यू ने पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के साथ मिलकर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग, डीएमएफ फंड में अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जेल में बंद हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह सप्लाई और खरीदी से जुड़े कथित घोटाले में प्रमुख बिचौलिए और कमीशन एजेंट के रूप में काम कर रहे थे।

वेंडरों को दिलाते थे सप्लाई ऑर्डर

जांच एजेंसियों के अनुसार छाबड़ा विभिन्न सरकारी विभागों, खासकर कृषि और उद्यानिकी विभाग में रेट कॉन्ट्रैक्ट वेंडरों को सप्लाई ऑर्डर दिलाने का काम करते थे। आरोप है कि इसके बदले 30 से 35 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। इसमें से करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ऊपर तक पहुंचाया जाता था, जबकि शेष रकम सतपाल छाबड़ा और मनदीप चावला के बीच बांटी जाती थी।

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जांच में यह भी सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी की जाती थी, लेकिन असली काम का आवंटन कथित रूप से एजेंटों के जरिए प्रभावित किया जाता था। वेंडरों पर कमीशन देने का दबाव बनाया जाता था।

छाबड़ा को कितनी मिली रकम..?

जांच के दौरान सतपाल छाबड़ा ने कथित तौर पर अलग-अलग लोगों से मिली रकम का ब्यौरा भी दिया। इसमें अशोक मिश्रा से 20 लाख नकद और 25 लाख बैंक ट्रांसफर, देवेंद्र जैन से 20 लाख 4 हजार 783 रुपये नकद और 1 करोड़ 13 लाख 25 हजार 832 रुपये बैंक ट्रांसफर, जसपाल सिंह होरा से 8 लाख 6 हजार 757 रुपये, पवन कुमार पोद्दार से 34 लाख 40 हजार रुपये तथा सुशील कुमार सिंह से 1 करोड़ 49 लाख 30 हजार 965 रुपये बैंक ट्रांसफर से प्राप्त होने की जानकारी शामिल है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक छाबड़ा ने कुल 40 लाख 4 हजार 783 रुपये नकद और 3 करोड़ 30 लाख 3 हजार 554 रुपये बैंक ट्रांसफर के जरिए मिलने की बात स्वीकार की है।

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पूछताछ में छाबड़ा ने यह भी बताया कि वर्ष 2019 से वह कृषि विभाग में सप्लाई संबंधी कार्यों में सक्रिय थे। उन्होंने कहा कि मनदीप चावला उर्फ ‘मेंडी’ ने उन्हें अनिल टुटेजा के प्रभाव का इस्तेमाल कर विभागीय काम दिलाने का प्रस्ताव दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए इस चरण में आरोपी की निरंतर हिरासत आवश्यक है।