टीआरपी डेस्क। China Taiwan Conflict 2026: दुनिया की नजरें इस वक्त मिडल ईस्ट पर टिकी हैं। हर कोई ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देख रहा है। लेकिन इसी बीच एशिया महाद्वीप से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। ताइवान के चारों तरफ चीन की मिलिट्री ने अचानक अपनी हलचल बहुत ज्यादा बढ़ा दी है। ऐसा लगता है कि चीन किसी बड़े ऑपरेशन की तैयारी में है।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों के भीतर ताइवान के बॉर्डर के पास चीन के 7 लड़ाकू विमान, 8 नौसैनिक युद्धपोत और 5 सरकारी जहाज मंडराते हुए देखे गए। इतना ही नहीं, चीन के ये सभी 7 विमान ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) के अंदर तक घुस गए।
चीन की इस घेराबंदी को देखकर ताइवान की सेना भी तुरंत एक्शन में आ गई। ताइवान के मिलिट्री हेडक्वार्टर से जुड़े सूत्रों के हवाले से खबर है कि चीनी सेना की हर एक हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है। सुबह 6 बजे तक चीनी जहाजों की मौजूदगी बॉर्डर पर दर्ज की गई थी। ताइवान इसे अपने देश पर सीधे हमले और कब्जे की तैयारी की तरह देख रहा है। हालात को देखते हुए ताइवान ने भी अपनी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया है।
इस पूरे विवाद में अब अमेरिका की भी एंट्री हो गई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग समिट में एक बेहद सीक्रेट और बड़ी चर्चा हुई है। ट्रंप ने खुद पत्रकारों को बताया कि उन्होंने शी जिनपिंग से ताइवान के मुद्दे पर सीधी बात की है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका इस पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए है।
यह पूरा विवाद आज का नहीं बल्कि दशकों पुराना है। दरअसल, चीन ताइवान को अपना ही एक हिस्सा मानता है। वह वन चाइना पॉलिसी के दम पर ताइवान को हड़पना चाहता है। दूसरी तरफ, ताइवान के पास अपनी खुद की चुनी हुई सरकार है, खुद की मजबूत सेना है, अलग कानून है और अपनी खुद की अर्थव्यवस्था है। ताइवान खुद को एक आजाद देश मानता है।
जानकारों का कहना है कि अगर चीन और ताइवान के बीच यह तनाव ऐसे ही बढ़ता रहा, तो दुनिया को एक और विनाशकारी युद्ध झेलना पड़ सकता है।



