मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने का मामला अब पूरी तरह से राष्ट्रीय स्तर पर गरमा गया है। मंगलवार की पूरी रात दिल्ली और भोपाल में चले ‘हाई-वोल्टेज धरने’ के बाद, बुधवार को कांग्रेस के शीर्ष रणनीतिकारों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली के निर्वाचन सदन पहुंचकर केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) से मुलाकात की।

कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के फैसले को पूरी तरह गलत, दुर्भावनापूर्ण और कानून के विरुद्ध बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने और मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बहाल करने की आधिकारिक मांग की है।

चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंची कांग्रेस की टीम

केंद्रीय चुनाव आयोग के समक्ष कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने पहुंचे इस हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन में कांग्रेस के राष्ट्रीय दिग्गजों की फौज में स्वयं उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन, केसी वेणुगोपाल (महासचिव, संगठन), अभिषेक मनु सिंघवी (वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता), विवेक तन्खा (वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद), रणदीप सिंह सुरजेवाला, जयराम रमेश और दीपा दासमुंशी शामिल थे।

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“सिर्फ निजी शिकायत और नोटिस के आधार पर फॉर्म रिजेक्ट करना तानाशाही”- सिंघवी

जाने-माने कानूनविद और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को ‘चौंकाने वाला और अवैध’ करार दिया। सिंघवी ने देश के स्थापित कानूनी सिद्धांतों का हवाला देते हुए मुख्य रूप से ये तर्क रखे:

संज्ञान नहीं तो केस नहीं: किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अदालत में कोई निजी शिकायत (Private Complaint) दर्ज होने मात्र से वह आपराधिक मामला नहीं बन जाता। जब तक संबंधित मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस शिकायत पर कानूनी रूप से संज्ञान (Cognisance) नहीं लेता, तब तक कानून की नजर में कोई आपराधिक प्रकरण अस्तित्व में ही नहीं माना जाता।

सिर्फ नोटिस मिला था: मीनाक्षी नटराजन के मामले में हैदराबाद की अदालत ने केवल एक निजी शिकायत पर उन्हें एक साधारण नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने अभी यह तय भी नहीं किया है कि इस शिकायत को स्वीकार (संज्ञान) करना भी है या नहीं। इस पर अभी सुनवाई होना बाकी है।

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छिपाने का सवाल ही नहीं: सिंघवी ने कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई आपराधिक मामला कानूनी तौर पर वजूद में ही नहीं था, तो उसे चुनावी हलफनामे (Affidavit) में प्रदर्शित करने या छिपाने का सवाल ही कहां पैदा होता है? भारतीय न्याय व्यवस्था और उच्च न्यायालयों के दर्जनों फैसले इस बात के गवाह हैं कि सिर्फ नोटिस मिलने से उम्मीदवार अयोग्य नहीं होता।

कल है आखिरी मौका

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को सौंपे अपने विस्तृत कानूनी दस्तावेज में साफ कहा है कि यदि इस पक्षपातपूर्ण फैसले को तुरंत नहीं पलटा गया, तो यह चुनाव में ‘समान अवसर’ (Level Playing Field) के संवैधानिक सिद्धांत की हत्या होगी।

गुरुवार है अंतिम दिन: कांग्रेस ने आयोग को ध्यान दिलाया कि इस बड़ी प्रशासनिक भूल को सुधारने के लिए अभी भी समय शेष है, क्योंकि गुरुवार (11 जून) नाम वापसी की अंतिम तिथि है। यदि आयोग अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर आज ही इस फैसले को पलट देता है, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बची रहेगी।

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सीट चोरी और लोकतंत्र की हत्या का आरोप, रात भर चला था धरना

बता दें कि इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर ‘सीट चोरी’ और ‘प्रशासन के दुरुपयोग’ का खुला आरोप लगाया है। मंगलवार रात को भोपाल में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, मप्र प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव दफ्तर के फर्श पर बैठकर आधी रात तक धरना दिया था, जिसके बाद डिप्टी सीईओ ने बुधवार को बात सुनने का आश्वासन दिया था। ठीक ऐसा ही नजारा दिल्ली में भी देखने को मिला था जहां केसी वेणुगोपाल और भूपेश बघेल रात को सड़क पर बैठ गए थे।

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