धार्मिक डेस्क। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी एकादशी भी है जो हर साल नहीं आती, बल्कि लगभग 3 साल में सिर्फ एक बार आती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं अधिकमास यानी मलमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परमा एकादशी की। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत सच्चे मन से करने से व्यक्ति के कई जन्मों के पाप, पुरानी दरिद्रता और जीवन के सारे आर्थिक कष्ट हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। इस बार परमा एकादशी का महाव्रत 11 जून यानी कल रखा जाएगा। ज्योतिषियों के मुताबिक जितना ज्यादा इस व्रत का पुण्य है, उतने ही कड़े इसके नियम भी माने गए हैं। व्रत के दौरान की गई एक छोटी सी भूल भी आपको इसके फल से वंचित कर सकती है। इसलिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

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परमा एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, इन चीजों से बना कर रखें दूरी

शास्त्रों के अनुसार परमा एकादशी (Parama Ekadashi 2026) के दिन तुलसी या किसी भी अन्य पौधे के पत्ते तोड़ना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। भगवान विष्णु की पूजा के लिए तुलसी दल की जरूरत होती है, इसलिए समझदारी इसी में है कि आप एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें। इसके अलावा घर में झाड़ू-पोछा लगाते समय विशेष सावधानी बरतें ताकि किसी चींटी या छोटे जीव-जंतु को कोई नुकसान न पहुँचे, क्योंकि इस दिन अहिंसा का पालन करना सबसे जरूरी धर्म माना गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को एक दिन पहले यानी दशमी तिथि की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन शुरू कर देना चाहिए। साथ ही इस दौरान लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन, मांसाहार और किसी भी तरह के नशे से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।

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चावल और बैंगन खाने की मनाही, सेंधा नमक का ही करें सीमित इस्तेमाल

एकादशी के पावन दिन पर सामान्य सफेद नमक का सेवन करना वर्जित माना जाता है। अगर सेहत की वजह से बहुत ज्यादा जरूरत हो, तो आप फलाहार में सीमित मात्रा में सेंधा नमक (Rock Salt) का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ ही इस दिन भोजन में चावल, मसूर की दाल, मूली और बैंगन का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल का त्याग करना अनिवार्य बताया गया है। व्रत के दौरान अपने मन को पूरी तरह साफ रखें। किसी की पीठ पीछे बुराई या निंदा करने और मन में गुस्सा या नकारात्मक विचार लाने से व्रत का पुण्य खत्म हो जाता है। एकादशी के दिन व्रती को दिन के समय सोने से भी बचना चाहिए। संभव हो तो रात में जागकर भगवान का भजन-कीर्तन करें, इससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

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व्रत के दिन जरूर करें ये काम, ब्राह्मणों को दान देने से मिलेगा मोक्ष का रास्ता

परमा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के कपड़े पहनकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक धूप, दीप और फलों से पूजा करें। शांत मन से व्रत की कथा सुनें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व पुराणों में बताया गया है। इस दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मणों को जूते, छाता, अनाज या कोई अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करना बेहद शुभ और फलदायी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत (Fast Rituals) करने वाला व्यक्ति न केवल इस भौतिक संसार में सभी सुखों और ऐश्वर्य को भोगता है, बल्कि मृत्यु के बाद उसे सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है।