नई दिल्ली। देश के शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों के बीच इस समय एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी एम्फी (AMFI) की तरफ से मई 2026 के जो ताजा आंकड़े जारी किए गए हैं, उसने सबको हैरान कर दिया है। लगातार कई महीनों से सोने में पैसा लगाने वाले निवेशकों ने अब अचानक गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) से अपना पैसा वापस निकालना शुरू कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अकेले मई के महीने में ही निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ से 700 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध निकासी यानी नेट आउटफ्लो (Net Outflow) कर ली है। यह ट्रेंड पिछले कई महीनों से चल रही ताबड़तोड़ खरीदारी के बिल्कुल उलट है।

मई आते-आते पूरी तरह बदल गई तस्वीर, ऊंचे दामों पर निवेशकों ने काटा मुनाफा


आपको बता दें कि साल 2026 की शुरुआत में गोल्ड ईटीएफ के प्रति निवेशकों का क्रेज सातवें आसमान पर था। जनवरी के महीने में तो स्थिति यह हो गई थी कि सोने में होने वाले निवेश ने बड़े-बड़े इक्विटी और शेयर बाजार के फंड्स को भी पीछे छोड़ दिया था। उस समय दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अनिश्चितता (Global Uncertainty) के बीच निवेशकों ने सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प माना था। लेकिन मई का महीना आते-आते पूरी तस्वीर ही बदल गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में एक तेज उछाल आया और घरेलू सराफा बाजार में भी सोना अपने ऑल टाइम हाई यानी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जैसे ही सोने के दाम आसमान पर पहुंचे, चतुर निवेशकों ने तुरंत बाजार में मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी और अपना पैसा निकालना बेहतर समझा।

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पिछले एक साल में पहली बार हुआ भारी आउटफ्लो, सामने आईं ये तीन बड़ी वजहें


बिजनेस रिपोर्ट्स की मानें तो मई 2026 के दौरान भारत के गोल्ड ईटीएफ से करीब 61 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम निकासी दर्ज की गई है। पिछले पूरे एक साल के इतिहास में यह पहली बार है जब सोने के इस सरकारी फंड से इतनी बड़ी रकम बाहर निकली है। बाजार के बड़े वित्तीय विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण जिम्मेदार हैं। पहला कारण सोने की कीमतों का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना है, जिससे हर कोई अपना प्रॉफिट बुक करना चाहता था। दूसरा बड़ा कारण सरकार की तरफ से सोने पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी (Gold Import Duty) को अचानक 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी करना रहा, जिससे घरेलू बाजार में सोने के दाम अचानक बहुत बढ़ गए। वहीं तीसरा कारण बाजार में चल रही भारी उठापटक रही, जिसकी वजह से निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस किया।

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जनवरी में आया था 24,000 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश, आगे क्या होंगे बाजार के संकेत


एम्फी के मासिक डेटा (AMFI Monthly Data) पर नजर डालें तो जनवरी 2026 में इसी गोल्ड ईटीएफ कैटेगरी में 24,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऐतिहासिक निवेश आया था। वहीं अगर पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो सोने में 68,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश दर्ज हुआ था। इससे साफ पता चलता है कि भारतीय निवेशक सोने को लंबे समय के लिए एक बेहद सुरक्षित और भरोसेमंद जरिया मानते हैं, लेकिन जैसे ही शॉर्ट टर्म में कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो वे मुनाफा कमाने का मौका भी हाथ से नहीं जाने देते। बाजार के जानकारों का कहना है कि मई का यह डेटा दिखाता है कि निवेशक अब काफी सतर्क हो चुके हैं और बहुत ज्यादा ऊंचे भाव पर नया पैसा लगाने से बच रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता ऐसे ही बनी रही, तो आने वाले महीनों में गोल्ड ईटीएफ में एक बार फिर से तगड़ा निवेश लौट सकता है।

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