गौरेला पेंड्रा मरवाही। प्रदेश सरकार के सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कलेक्टर संतोष देवांगन ने लापरवाही पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया। मरवाही वनमंडल में मजदूरों के पिछले दो महीनों से रुके भुगतान की स्पष्ट जानकारी न देने पर कलेक्टर ने मंच से ही वन विभाग के उपमंडलाधिकारी अविनाश इमानुअल को जमकर फटकार लगाई। कलेक्टर ने दो टूक कहा कि गरीब मजदूर अपनी मेहनत की मजदूरी मांग रहा है, कोई भीख नहीं।
क्या है पूरा मामला
जनसमस्या निवारण शिविर में एक ग्रामीण ने शिकायत दर्ज कराई कि वन विभाग में कार्यरत मजदूरों का भुगतान पिछले दो से ढाई माह से लंबित है। शिकायत के अनुसार, एक मजदूर के लगभग 70 हजार रुपये तथा विभाग के कुल 6 लाख रुपये के वाउचर का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। जब कलेक्टर संतोष देवांगन ने इस संबंध में वन विभाग के एसडीओ अविनाश इमानुअल से जानकारी मांगी, तो वे संतोषजनक और स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। कागजी कार्रवाई में देरी देखकर कलेक्टर का पारा चढ़ गया।
तहसीलदार 3 दिन में भुगतान कर देता है
एसडीओ की अधूरी तैयारी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कलेक्टर संतोष देवांगन ने मंच से कहा, जब हमारा तहसीलदार पशु हानि की स्थिति में 3 दिन में 4 लाख रुपये का भुगतान कर दे रहा है, तो आप लोग किसी की मजदूरी के 70 हजार रुपये के लिए दो महीना क्यों घुमाते हो। हमारे हेड में पैसा रहता है, आपके हेड में कैसे पैसा नहीं रहता।
डीएफओ पर भी कसा तंज
कलेक्टर यहीं नहीं रुके। उन्होंने मौके से अनुपस्थित रहने वाले बड़े अधिकारियों पर भी तंज कसा और एसडीओ से कहा, मरवाही वनमंडल के डीएफओ कभी शिविर में रहते नहीं हैं। आप लोगों को बलि का बकरा बना कर भेज देते हैं और हर जगह आप लोगों को बिना तैयारी के भेज दिया जाता है। शिविर में आना था तो पूरी तैयारी के साथ आना था। वाउचर कहां अटका है, एलओसी की क्या स्थिति है इसकी पूरी जानकारी आपके पास होनी चाहिए थी।
30 जून से पहले भुगतान का अल्टीमेटम
कलेक्टर की सख्ती के बाद एसडीओ अविनाश इमानुअल ने सफाई देते हुए कहा कि वाउचर आगे भेज दिया गया है और आवंटन मिलते ही भुगतान कर दिया जाएगा। जब उन्होंने कहा कि 30 जून से पहले भुगतान कर देंगे, तो कलेक्टर ने सख्त लहजे में जनता के सामने तारीख तय कराई और कहा कि समय तारीख बताइए 30 जून है। पब्लिक को बता दीजिए कि तीस दिन के पहले भुगतान कर देंगे। कलेक्टर ने विभाग को एक हफ्ते के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने और जून से पहले हर हाल में भुगतान सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि दो महीने हो गए, एक महीना और लगाओगे तो कोई मजदूर काम नहीं करेगा।
तालियों से गूंजा शिविर
टेंट के नीचे आयोजित इस शिविर के मंच पर कलेक्टर समेत 15 से अधिक आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। जैसे ही कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए गरीब मजदूरों के हक में अफसरों की जवाबदेही तय की, वैसे ही कुर्सियों पर बैठे सैकड़ों ग्रामीणों और विशेषकर महिलाओं ने तालियां बजाकर इस फैसले का स्वागत किया।



