बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक और मामले में बालोद जिले के कलेक्टर के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने साफ कहा कि हाईस्कूल प्राचार्य द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी होता है और नियमों के तहत कलेक्टर को इन्हें निलंबित करने का अधिकार नहीं है।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता बाल सिंह मंडावी बालोद जिले के गुरूर ब्लॉक स्थित शासकीय हाई स्कूल, सोहपुर में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। बालोद कलेक्टर ने 7 मई 2026 को आदेश जारी कर उन्हें निलंबित कर दिया था। प्राचार्य ने कलेक्टर के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
वकील ने क्या दलील दी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि हाईस्कूल प्राचार्य का पद द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी का होता है। सेवा नियमों के मुताबिक कलेक्टर इनके सेवा मामलों में निलंबन आदेश जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं। इसलिए कलेक्टर का आदेश कानूनी रूप से गलत है।
हाईकोर्ट का फैसला
सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि यह कानूनी सिद्धांत अब पूरी तरह स्थापित हो चुका है कि कलेक्टर द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित शासकीय सेवक के खिलाफ निलंबन आदेश पारित नहीं कर सकता।
कोर्ट ने बालोद कलेक्टर का 7 मई 2026 का निलंबन आदेश खारिज कर दिया। हालांकि राज्य सरकार को छूट दी कि यदि जरूरी हो तो संबंधित सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से नियमों के तहत नए सिरे से कार्रवाई की जा सकती है।
एक साथ 8 प्राचार्यों को किया था निलंबित
गौरतलब है कि बालोद जिले में शिक्षा विभाग व कलेक्टर ने बोर्ड परीक्षाओं में खराब परीक्षा परिणाम पर कार्रवाई की थी। इसमें अति कमजोर प्रदर्शन वाले आठ प्राचार्यों को निलंबित कर दिया गया, जबकि 14 प्राचार्यों की वेतन वृद्धि रोक दी गई थी। जिला प्रशासन का कहना था कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक व संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद कमजोर परीक्षा परिणाम लापरवाही का नतीजा है। हालांकि इस कार्रवाई को शिक्षक संगठनों ने गलत व एकपक्षीय बताया, वहीं कुछ प्राचार्य इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट चले गए। इसी कड़ी में पूर्व में एक प्राचार्य के निलंबन आदेश को हाईकोर्ट अवैध ठहरा चुका है।



