रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी बिजली कंपनियों के संविदा कर्मचारियों ने प्रबंधन से वार्ता विफल होने के बाद ‘अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन’ शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने साफ कहा है कि जब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, कोई भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटेगा। इससे पूरे प्रदेश में बिजली आपूर्ति और मेंटेनेंस पर संकट मंडराने लगा है।
वार्ता में नहीं पहुंचे सक्षम अधिकारी, भड़के कर्मचारी
संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरिचरण साहू और महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने बताया कि 22 जून को CSPDCL के उच्च प्रबंधन के साथ बैठक होनी थी। लेकिन मीटिंग में कोई सक्षम अधिकारी मौजूद नहीं हुआ और प्रतिनिधियों को बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया। प्रबंधन के इस रवैये से नाराज होकर संघ ने आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने का फैसला लिया।
“पुराने कर्मी 2 साल में नियमित, हमारा 10 साल से शोषण”
संघ ने प्रबंधन पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। संघ के मुताबिक: 2007, 2009 और 2011 में भर्ती संविदा कर्मियों को 2 साल में नियमित कर दिया गया था मगर 2016 और 2018 में भर्ती कर्मियों को 8-10 साल काम करने के बाद भी नियमितीकरण का लाभ नहीं मिला। संघ का कहना है कि मैदानी काम स्थायी प्रकृति के हैं, फिर भी संविदा कर्मियों से कम वेतन में जोखिम भरा काम कराया जा रहा है।
जोखिम भरे काम में अब तक 41 कर्मियों की मौत
संघ ने इसे सामाजिक सुरक्षा की लड़ाई बताया। आंकड़ों के अनुसार लाइन मेंटेनेंस के दौरान हादसों में अब तक 41 संविदा कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों कर्मचारी करंट लगने से स्थायी या अस्थायी रूप से अपंग हो चुके हैं। आरोप है कि इतने हादसों के बाद भी प्रबंधन का रवैया पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनहीन बना हुआ है।
संघ ने कहा है कि जब तक सरकार और प्रबंधन नियमितीकरण का लिखित आदेश जारी नहीं करता, हड़ताल जारी रहेगी। कर्मचारियों ने जनता से अपील की है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उनकी मजबूरी को समझें और समर्थन दें।



