टीआरपी। रायपुर नगर निगम द्वारा अवैध नल कनेक्शनों को वैध करने के लिए ₹15,882 (कुल लगभग 20 हजार रुपये) का भारी-भरकम शुल्क तय किए जाने के फैसले पर सियासत गरमा गई है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस निर्णय को जनविरोधी और अमानवीय बताते हुए इसे गरीबों की प्यास पर डाका डालने वाला ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया है।
यह मुद्दा सीधे तौर पर रायपुर शहर के हजारों गरीब, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब और उनकी बुनियादी जरूरत (पानी) से जुड़ा है। शुल्क में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी से जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में शहर के सभी 10 जोनों में पार्षदों और आम जनता का तीखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के फैसलों का हवाला देते हुए बताया कि 15 जून 2023 को एमआईसी (MIC) ने मात्र 100 रुपये शुल्क और 500 रुपये जुर्माना लेकर सभी अवैध कनेक्शनों को वैध करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा की महापौर और आयुक्त ने इसे सीधे 200 गुना बढ़ाकर ₹20,000 के करीब पहुंचा दिया है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने सरकार और निगम प्रशासन को घेरते हुए कहा कि शहर में न तो सफाई की उचित व्यवस्था है, न टैंकर मिल रहे हैं और न ही नलों में पर्याप्त पानी आ रहा है; इसके बावजूद जनता पर पहले यूजर चार्ज और अब पानी का यह ‘ट्रिपल अटैक’ किया जा रहा है। विपक्ष ने मांग की है कि इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाए और जब तक सभी 10 जोनों में नियमितीकरण के लिए विशेष शिविर नहीं लगाए जाते, तब तक किसी भी गरीब का नल कनेक्शन न काटा जाए।
विपक्ष का आरोप: अवैध नल कनेक्शन वैध करने का शुल्क सीधे 200 गुना बढ़ाकर लगभग ₹20,000 किया गया।
पुरानी दर का हवाला: कांग्रेस सरकार के समय मात्र ₹100 शुल्क और ₹500 जुर्माना तय था।
प्रमुख मांग: इस जनविरोधी आदेश को तुरंत वापस लेकर 10 जोनों में शिविर लगाने तक नल काटने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
विपक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस आर्थिक बोझ को कम नहीं किया गया और जबरन नल काटने की कार्रवाई शुरू हुई, तो कांग्रेस और विपक्ष रायपुर की जनता के हक के लिए नगर निगम का घेराव कर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



