टीआरपी। निजी हाउसिंग सोसायटियों और कॉलोनियों की लंबित समस्याओं को एक मंच से उठाने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर की विभिन्न रेसिडेंशियल सोसायटियों ने एकजुट होकर “फेडरेशन ऑफ रेसिडेंशियल सोसायटीज़” का गठन किया है। इस नवगठन के साथ ही फेडरेशन ने कुछ बिल्डरों की मनमानी, परियोजनाओं के अधूरे हैंडओवर तथा रेरा (RERA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रायपुर में रहने वाले हजारों फ्लैट और प्लॉट खरीदारों के लिए यह एक बड़ी और राहत भरी खबर है। बिल्डरों द्वारा पजेशन और मेंटेनेंस के नाम पर की जाने वाली मनमानी के खिलाफ अब तक लोग अकेले लड़ रहे थे, लेकिन अब इस साझा मंच के बनने से रेरा और कोर्ट में नागरिकों का पक्ष बेहद मजबूत होगा।
रेरा के खिलाफ हाईकोर्ट में PIL दाखिल करने की तैयारी
गठन के पश्चात पाम बेलाजियो में फेडरेशन की पहली अवेयरनेस एवं इंटरेक्शन मीट आयोजित की गई। इस बैठक में शहर की 30 से अधिक सोसायटियों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मीट में सभी प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी सोसायटी की समस्याओं, बिल्डरों से उत्पन्न परेशानियों तथा हैंडओवर एवं मेंटेनेंस से जुड़ी कठिनाइयों से एक-दूसरे को वन-टू-वन अवगत कराया, जिससे साझा समाधान की दिशा में ठोस आधार तैयार हुआ।
प्रतिनिधियों का आरोप है कि रेरा बिल्डरों के पक्ष में एकतरफा कार्य कर रहा है, जिससे रहवासियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि रेरा ने अपने ही अधिनियमों का पालन ग्राहकों और नागरिकों के लिए नहीं किया, तो फेडरेशन सभी सोसाइटी निवासियों के हित में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (High Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेगी। इसके साथ ही हर 15 दिन में अलग-अलग सोसायटियों में नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन इस दिशा में फेडरेशन को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन पहले ही दे चुका है। संगठन आगे चलकर रायपुर के अलावा दूसरे जिलों में भी अपना विस्तार करेगा। इस मौके पर शहर के नामी पत्रकार श्रीप्रकाश तिवारी का सम्मान भी किया गया, जो निजी सोसाइटियों की परेशानियों को मीडिया में नियमित रूप से उठा रहे हैं।
रायपुर की 30 से अधिक रेसिडेंशियल सोसायटियों ने एकजुट होकर “फेडरेशन ऑफ रेसिडेंशियल सोसायटीज़” का गठन किया है।
बिल्डरों की मनमानी और नियमों की अनदेखी पर फेडरेशन ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में PIL दाखिल करने का निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़ शासन की ओर से इस संगठन को समस्याओं के निराकरण के लिए पहले ही पूर्ण सहयोग का आश्वासन मिल चुका है।
फेडरेशन आगामी 15 दिनों के भीतर अपनी अगली बैठक रणनीति तय करने के लिए करेगी। इसके साथ ही बिल्डरों द्वारा परियोजनाओं का पूर्ण हैंडओवर न किए जाने की स्थिति में कानूनी और जमीनी स्तर पर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।



