बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने फॉरेस्ट रेंजर और सहायक वन संरक्षक भर्ती मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फिजिकल टेस्ट में असफल 20 अभ्यर्थियों की अपील खारिज करते हुए कहा कि भर्ती नियमों में प्रावधान नहीं होने पर दोबारा परीक्षा की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही वेटिंग लिस्ट से रिक्त पद भरने का रास्ता साफ हो गया है।
DB ने कहा- नियमों में बदलाव नहीं कर सकते
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही पूरी की जानी चाहिए और बीच में नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ वन (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2015 में री-टेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है।
जानें, क्या था मामला…
12 सितंबर 2023 को आयोजित पैदल चाल परीक्षा में 27 अभ्यर्थी असफल हो गए थे। अभ्यर्थियों ने ट्रैफिक जाम, खराब मौसम और अव्यवस्था का हवाला देते हुए दोबारा फिजिकल टेस्ट की मांग की थी। राज्य सरकार ने 18 जनवरी 2024 को पुनः परीक्षा का आदेश जारी किया, लेकिन वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
सरकार ने वापस लिया था आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग की कानूनी राय के बाद सरकार ने 20 जून 2024 को अपना आदेश वापस ले लिया। सरकार का तर्क था कि भर्ती नियमों में दोबारा फिजिकल टेस्ट का प्रावधान नहीं है। शारीरिक दक्षता परीक्षा भर्ती की अनिवार्य योग्यता का हिस्सा है और सभी 211 अभ्यर्थियों की परीक्षा समान परिस्थितियों में हुई थी।
पहले एकलपीठ ने भी खारिज की थी याचिका
एकलपीठ से राहत नहीं मिलने पर 20 अभ्यर्थियों ने डिवीजन बेंच में अपील की थी। कोर्ट ने सरकार का पक्ष स्वीकार करते हुए कहा कि 20 जून 2024 का निर्णय नियमों के अनुरूप है। अब रिक्त पद वेटिंग लिस्ट के पात्र अभ्यर्थियों से भरे जाएंगे।



