अंबिकापुर। सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के सरभंजा में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान की अंतिम जनसुनवाई का गुरुवार को ग्रामीणों ने बहिष्कार कर दिया। बारिश के बीच सैकड़ों लोगों ने पंडाल से बाहर निकलकर ‘सीएमडीसी हटाओ-मैनपाट बचाओ’ के नारे लगाए। विरोध में तिब्बती समाज भी शामिल हुआ और मां कुदरगढ़ी एल्यूमिनियम प्लांट का भी विरोध किया।

अधिकारियों के कहने पर पंडाल से बाहर आए ग्रामीण

बताया गया कि जनसुनवाई शुरू होने पर अधिकारियों ने खदान के समर्थन वालों को पंडाल में रुकने और विरोधियों को बाहर जाने को कहा। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण बाहर निकल आए। बारिश शुरू होने के बावजूद प्रदर्शन जारी रहा। विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े स्थानीय लोगों ने भी खदान का विरोध किया और जनसुनवाई प्रक्रिया को निष्पक्ष नहीं बताया।

225 हेक्टेयर में प्रस्तावित खदान

बता दें कि सरभंजा में लगभग 225 हेक्टेयर क्षेत्र में बॉक्साइट खदान प्रस्तावित है। इसमें करीब 70 हेक्टेयर तिब्बती पुनर्वास क्षेत्र और लगभग 47 हेक्टेयर मांझी जनजाति की भूमि शामिल है। परियोजना के तहत हर साल करीब 14.5 लाख मीट्रिक टन बॉक्साइट खनन का प्रस्ताव है।

See also   जोशीमठ के स्थानीय लोगों ने NTPC के खिलाफ खोला मोर्चा   

पर्यावरणीय रिपोर्ट पर भी सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि राज्य स्तरीय पर्यावरण आकलन समिति की रिपोर्ट जनसुनवाई से पहले नहीं दी गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि रिपोर्ट में 15 किमी के दायरे में पर्यटन स्थल नहीं बताए गए, जबकि पास में मछली प्वाइंट, दूधधारा और ललेया का रिजर्व फॉरेस्ट है। इन तथ्यों को शामिल न करने पर आपत्ति जताई गई। वहीं अधिकारियों का कहना है कि जानकारी पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले ही दी जा चुकी थी।