रायपुर। छत्तीसगढ़ में 15 से 20 साल से स्कूलों में पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों के लिए अब खुद परीक्षा हॉल में बैठने की बारी आ गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2001 से 2010 के बीच नियुक्त शिक्षकों को 21 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना अनिवार्य हो गया है। प्रदेश में करीब 80 हजार शिक्षक इस दायरे में हैं। समय पर पास नहीं करने पर इनके ऊपर नौकरी पर संकट मंडरा रहा है।

क्यों देनी होगी टीईटी?

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद NCTE के नियमों के अनुसार 3 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच नियुक्त प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना जरूरी है।

इस मुद्दे पर लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली। शिक्षकों को उम्मीद थी कि उन्हें छूट मिलेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी देना होगा। पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी है। कोर्ट ने राहत देते हुए अंतिम तिथि 21 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 21 अगस्त 2028 कर दी है।

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50+ उम्र के शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती

प्रदेश में बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है जिनकी उम्र 50 से 55 साल हो चुकी है। पिछले 15-20 साल से पढ़ा रहे इन शिक्षकों के लिए अब किताबों और प्रतियोगी परीक्षा के पैटर्न के साथ तालमेल बिठाना मुश्किल है।

समस्या ये भी है कि रोज स्कूल संचालन, मूल्यांकन और प्रशासनिक काम में व्यस्त रहने के कारण पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं है। शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम भी इस दौरान काफी बदल चुका है।

शिक्षक संगठनों की मांग

शिक्षक संगठनों का कहना है कि इन अनुभवी शिक्षकों ने सालों तक शिक्षा व्यवस्था को संभाला है। उन्हें सेवा से हटाने की बजाय सरकार को मदद करनी चाहिए।

संगठनों ने मांग की है कि निःशुल्क कोचिंग और विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाए।परीक्षा के लिए पर्याप्त अवसर दें ताकि बिना दबाव पास कर सकें।

इस मुद्दे पर शिक्षा विभाग की ओर से भी आगे दिशा-निर्देश जारी होने की संभावना है। प्रदेशभर के लगभग 80 हजार शिक्षक अब टीईटी की तैयारी में जुटने की योजना बना रहे हैं।

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आने वाले 2 साल इन शिक्षकों के लिए सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि पूरे सेवा भविष्य का फैसला करेंगे।