रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे के नाम रहा। सदन शुरू होते ही कांग्रेस ने राम मंदिर चंदा मामले, नशे के कारोबार और बढ़ते अपराध के मुद्दों पर विरोध किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के कारण कार्यवाही कई बार बाधित हुई।

सदन में क्या हुआ ?

कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर नारेबाजी की। कांग्रेस ने प्रदेश में नशे के कारोबार और अपराध को भी मुद्दा बनाया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार रोकनी पड़ी। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव का पलटवार

विधानसभा में कांग्रेस के विरोध पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस राम मंदिर चोरी का मुद्दा कांग्रेस उठा रही है, वह उत्तर प्रदेश का मामला है, उसका छत्तीसगढ़ विधानसभा से कोई सीधा संबंध नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी सदन की कार्यवाही बाधित कर जनता के धन और समय का दुरुपयोग कर रही है। अरुण साव ने कांग्रेस पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगाते हुए पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर भी निशाना साधा।

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विपक्ष का जवाब, बघेल ने दिखाई रसीद

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि जब इस सदन से राम मंदिर निर्माण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित हो सकता है, तो मंदिर से जुड़े मुद्दे क्यों नहीं उठ सकते। उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी श्रद्धा से चंदा दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया के सामने एक लाख इक्कीस हजार रुपये के दान की रसीद भी दिखाई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से राम मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों का चंदा लिया गया। चरण दास महंत ने कहा कि सभी विधायक भी दान कर चुके हैं, लेकिन अचानक कार्यवाही होने के कारण वे अपनी रसीदें साथ नहीं ला सके। उन्होंने कहा कि भगवान राम का छत्तीसगढ़ से विशेष संबंध है और इसलिए यह विषय प्रदेश की जनता की आस्था से जुड़ा हुआ है।

इस तरह मानसून सत्र का पहला दिन आरोप-प्रत्यारोप में बीत गया। सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर राजनीतिक मुद्दों से सदन रोकने का आरोप लगाया, वहीं विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही मांगी। अब देखना होगा कि आगे के दिनों में सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा होती है या टकराव जारी रहता है।

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