Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन खरीद का मुद्दा जोर-शोर से उठा, जिसमें विपक्ष ने सरकार की दवा खरीद प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल खड़े किए। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में स्पष्ट किया कि राज्य में गुजरात में प्रतिबंधित दवाओं की कोई खरीद नहीं की गई है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को स्वास्थ्य, सड़क और सुरक्षा जैसे जनहित के कई ज्वलंत मुद्दों पर सदन में जोरदार बहस हुई। जहां एक ओर विपक्ष ने अमानक दवाओं की खरीद और अस्पतालों में सुरक्षा पर सवाल उठाए, वहीं सरकार की ओर से संबंधित मंत्रियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए भविष्य में सुधार का भरोसा दिया।
राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ी है। विपक्ष के इस हंगामे ने प्रदेश की दवा खरीद व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की सुरक्षा को लेकर जनता के बीच चर्चा तेज कर दी है, जिससे पारदर्शिता की मांग बढ़ी है।
विपक्ष का आरोप, मरीजों की जान जोखिम में डालकर दवाएं खरीदी
प्रश्नकाल के दौरान विधायक अटल श्रीवास्तव ने अमानक दवाओं के मुद्दे पर सरकार से तीखे सवाल पूछे। विपक्ष ने जानना चाहा कि जिस कंपनी की दवाओं को गुजरात में प्रतिबंधित किया गया था, उसे छत्तीसगढ़ में किन परिस्थितियों में और कितनी मात्रा में खरीदा गया। विपक्ष का आरोप था कि मरीजों की जान जोखिम में डालकर ऐसी दवाएं खरीदी गईं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि 25 मार्च 2026 को CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन) को गुजरात से सूचना प्राप्त हुई थी। उन्होंने बताया कि राज्य में खरीदी गई एस्पिरिन 75 mg (अनकोटेड) दवा, गुजरात में ब्लैकलिस्ट की गई दवाओं के बैच से पूरी तरह अलग थी।
वहीं, भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने अस्पतालों में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन का मुद्दा उठाया, जिस पर मंत्री ने भविष्य के टेंडरों में कड़े प्रावधान जोड़ने का आश्वासन दिया।
सड़कों और सुरक्षा के मोर्चे पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्थिति स्पष्ट की। लुंड्रा क्षेत्र की सड़कों के मामले में उन्होंने बताया कि 87 सड़कें अभी मरम्मत अवधि (Defect Liability Period) में हैं। अग्निशमन सेवाओं को लेकर उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य के छह जिलों में अभी भी फायर स्टेशन नहीं हैं, लेकिन इनके आधुनिकीकरण के लिए 1 अरब 56 करोड़ 71 लाख 29 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में टेंडर प्रक्रिया में पुलिस सत्यापन को अनिवार्य बनाया जाएगा और बजट उपलब्धता के साथ सड़कों के लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।
विस्तृत जांच की मांग
विपक्ष ने इस मामले में विस्तृत जांच की मांग की है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भविष्य में दवा खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि क्या सरकार इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देती है या नहीं।
क्या है खास बातें
1 – सीजीएमएससी को 25 मार्च 2026 को ब्लैकलिस्टिंग की जानकारी मिली
2 – इसके पश्चात यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड के साथ सभी खरीद आदेश और रेट कांट्रेक्ट को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया
3 – सरकार ने स्पष्ट किया है कि गुजरात में प्रतिबंधित दवा और छत्तीसगढ़ में खरीदी गई दवा अलग-अलग उत्पाद है।
4 – जून 2026 तक प्रदेश के 6 जिलों में फायर स्टेशन नहीं हैं। फायर स्टेशनों के आधुनिकीकरण हेतु 1 अरब 56 करोड़ 71 लाख 29 हजार रुपये की मंजूरी मिली है।
5 – लुंड्रा क्षेत्र की 87 सड़कें अभी मरम्मत अवधि में हैं।
6 – प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पर एक ही प्रश्न पर आठ विधायकों ने पूरक प्रश्न पूछे।


