Train Derailment Case : बिलासपुर मंडल के करगी रोड रेलवे स्टेशन पर 13 जुलाई को हुई मालगाड़ी डिरेलमेंट मामले में RPF ने बड़ी कार्रवाई की है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बिलासपुर से इंदौर तक छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि इस साजिश का मुख्य आरोपी निजी ठेकेदार पवन नायक अब भी फरार है।

क्या हुआ था 13 जुलाई को ?

Train Derailment Case : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के बिलासपुर रेल मंडल में 48 घंटे के भीतर दूसरा रेल हादसा हो गया। सोमवार दोपहर करगी रोड रेलवे स्टेशन पर डाउन मेन लाइन से गुजर रही एक मालगाड़ी ट्रैक पर पड़ी जेसीबी मशीन की बकेट से टकरा गई। टक्कर के बाद इंजन के पीछे लगे तीन वैगन पटरी से उतर गए। हादसे से प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर रेल संचालन प्रभावित रहा। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। इससे पहले शनिवार को बिलासपुर स्टेशन से कुछ मीटर की दूरी पर मालगाड़ी डिरेल हो गई थी।

Train Derailment Case : रेलवे के मुताबिक सोमवार दोपहर करीब 2.20 बजे मालगाड़ी पीसीएमसी से आकर करगी रोड स्टेशन की डाउन मेन लाइन नंबर-3 से गुजर रही थी। इसी दौरान लोको पायलट ने ट्रैक पर जेसीबी की बकेट पड़ी देख तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाए, लेकिन ट्रेन और बाधा के बीच दूरी कम होने से मालगाड़ी समय पर नहीं रुक सकी। टक्कर के बाद इंजन के पीछे लगे पहला, तीसरा और छठवां वैगन पटरी से उतर गए।

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Train Derailment Case : हादसे की सूचना मिलते ही इंजीनियरिंग, परिचालन और तकनीकी विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। बहाली के दौरान एक डिरेल वैगन के नीचे जेसीबी की बकेट फंसी नजर आयी, जिससे वैगनों को दोबारा पटरी पर चढ़ाने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी। बाद में विशेष उपकरणों की मदद से राहत और बहाली का काम आगे बढ़ाया गया।

घटना के कारण प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर रेल संचालन प्रभावित रहा। रेलवे ने अन्य उपलब्ध लाइनों से ट्रेनों का संचालन जारी रखा।

मालगाड़ी आता देख बकेट छोड़ कर भागे थे मजदूर

Train Derailment Case : जांच में सामने आया कि JCB का बकेट प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर उतारा गया था। 5-6 मजदूर उसे प्लेटफॉर्म नंबर-1 की तरफ ले जा रहे थे। इसी दौरान मालगाड़ी को आता देखकर मजदूर भारी बकेट को ट्रैक पर ही छोड़कर भाग गए। बकेट ट्रैक पर रहने की वजह से गुजर रही मालगाड़ी के 3 वैगन पटरी से उतर गए।

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RPF ने कैसे किया का खुलासा ?

RPF ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर से इंदौर तक के रेलवे स्टेशनों की CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्य खंगाले।

रेलवे कोच में ही लाया गया था बकेट

Train Derailment Case : जांच में पता चला कि जेसीबी के बकेट को अनूपपुर जिले के करपा निवासी निजी ठेकेदार पवन नायक ने इंदौर-बिलासपुर नर्मदा एक्सप्रेस (18233) के ए-1 कोच में कोच अटेंडेंट की मदद से इंदौर से करगीरोड भेजा था। स्टेशन पर बकेट उतारने के बाद 5-6 मजदूर उसे प्लेटफॉर्म नंबर-1 की ओर ले जा रहे थे। इसी दौरान मालगाड़ी आते देख मजदूर बकेट को ट्रैक पर छोड़कर हट गए, जिससे ट्रेन के तीन वैगन बेपटरी हो गए।

घटना के बाद आरपीएफ ने इंदौर से बिलासपुर के बीच आने वाले रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच में इंदौर स्टेशन पर बकेट को ए-1 कोच में लोड करते हुए देखा गया। इसके बाद बिलासपुर में कोच अटेंडेंट से पूछताछ की गई, जिससे बकेट की लोडिंग और अनलोडिंग में शामिल लोगों की पहचान हुई। मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसलापुर आरपीएफ पोस्ट की टीम ने रेलवे अधिनियम के तहत 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

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ये हैं गिरफ्तार आरोपी :

  1. कमलेश टेकाम उर्फ मुन्ना, 25 वर्ष
  2. नरहर सिंह उर्फ पिंटू, 35 वर्ष
  3. देवा सिंह, 38 वर्ष
  4. बुद्धू सिंह, 49 वर्ष
  5. छत्रपति मरावी, 32 वर्ष
  6. लोकेश मांडवी, 19 वर्ष
  7. अनुराग मरावी, 31 वर्ष
  8. अभिषेक यादव, 21 वर्ष
  9. मोहम्मद समीर, 24 वर्ष – JCB बकेट मंगवाने वाला
  10. अमित यादव, 23 वर्ष – कोच अटेंडेंट

मुख्य आरोपी अभी फरार

Train Derailment Case : RPF के मुताबिक इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड निजी ठेकेदार पवन नायक है। घटना के बाद से वह फरार है। पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।

RPF ने सभी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ रेलवे एक्ट और IPC की धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

ट्रैक पर लापरवाही से सामान छोड़ने के कारण करोड़ों की सरकारी संपत्ति को नुकसान और यात्रियों की जान को खतरा हुआ। RPF ने 48 घंटे के अंदर 10 लोगों को पकड़कर मामले का खुलासा कर दिया है।