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High Court grants major relief to women excluded from police recruitment

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के भंवरपुर परीक्षा केंद्र में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान हुए सामूहिक नकल के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में 4 शिक्षकों और 1 चपरासी को दोषी मानते हुए विभाग ने आरोप पत्र जारी कर दिया है।

इस मामले की स्वतः संज्ञान के आधार पर सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। पूर्व में कोर्ट ने यह पूछा था कि अब तक परीक्षा के समय ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ के खिलाफ कोई भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस संबंध में शिक्षा सचिव से शपथ मांगा गया। जिसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने शपथ पत्र पेश कर पूरी जानकारी दी।

कौन-कौन दोषी पाए गए

स्कूल शिक्षा सचिव ने कोर्ट में पेश शपथ पत्र में 5 लोगों का नाम बताया। विभाग की जांच में ये सभी परीक्षा केंद्र में सामूहिक नकल कराने के दोषी पाए गए।

  1. गंगा प्रसाद पटेल – व्याख्याता
  2. अनिरुद्ध भोई – व्याख्याता
  3. दिनेश कुमार दास – व्याख्याता
  4. दुर्गा प्रसाद पटेल – सहायक शिक्षक, एलबी
  5. विजया बुड़ेक – भृत्य, चपरासी
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विभाग ने सभी को आरोप पत्र जारी कर दिए हैं। आरोप पत्र का जवाब देने के लिए इन्हें समय दिया गया है। जवाब आने के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

हाईकोर्ट ने कार्रवाई संबंधी मांगी रिपोर्ट

डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा सचिव से एक और शपथ पत्र मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि आरोप पत्र और शिक्षकों-कर्मचारियों के जवाब के बाद विभाग ने आगे क्या कार्रवाई की, इसकी साफ-साफ जानकारी देनी होगी।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि विभागीय जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश की जाए। अगर जांच पूरी हो जाती है तो उसका आखिरी नतीजा और संबंधित आदेश भी रिकॉर्ड में लगाए जाएं। इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

क्या है पूरा मामला ?

ये पूरा विवाद महासमुंद के भंवरपुर परीक्षा केंद्र से जुड़ा है। 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान नीता नाम की एक छात्रा ने परीक्षा हॉल में खुलेआम नकल कराने का वीडियो अपने मोबाइल से बना लिया।

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छात्रा ने इसे स्टिंग ऑपरेशन के जरिए रिकॉर्ड कर सबूतों के साथ पहले डीईओ कार्यालय में शिकायत की। वहां सुनवाई न होने पर उसने माध्यमिक शिक्षा मंडल में लिखित शिकायत दी। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

आखिरकार मामला मीडिया में आने के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने खुद संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में रजिस्टर करने का आदेश दिया। तभी से डिवीजन बेंच में इसकी सुनवाई चल रही है।

बोर्ड परीक्षा जैसे अहम मौके पर सामूहिक नकल और उसमें शिक्षकों की भूमिका सामने आने से शिक्षा विभाग की साख पर सवाल उठे हैं। अब हाईकोर्ट की निगरानी में विभाग को अपनी कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट देनी होगी।