Paddy Scam : कांकेर जिले के कोरर थाना क्षेत्र में स्थित धान उपार्जन केंद्र तालाकुर्रा में खरीदी और भंडारण के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। यहां सरकारी धान में करोड़ों रुपये का गबन किया गया। मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने सहकारी समिति के 3 कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
कैसे खुला घोटाले का राज ?
Paddy Scam : यह पूरा मामला खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 से जुड़ा है। शिकायत आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित मरकाटोला के प्रबंधक संतोष राजपूत ने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि 15 नवंबर 2025 से 12 जुलाई 2026 के बीच तालाकुर्रा केंद्र में धान खरीदी और भंडारण में भारी अनियमितता हुई है।
शिकायत के बाद पहले 10 जुलाई को केंद्र का भौतिक सत्यापन कराया गया। फिर 12 जुलाई को प्रशासन और मार्कफेड के अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम ने गोदाम की जांच की। इसी जांच में सारा सच सामने आया।
कागज पर कुछ, गोदाम में कुछ भी नहीं
Paddy Scam : जांच रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में किसानों से भारी मात्रा में धान खरीदा गया था।
दरअसल इस केंद्र में कुल 41 हजार 422 क्विंटल से ज्यादा धान की खरीदी दिखाई गई। इसमें से 37 हजार 396 क्विंटल धान मिलों में भेजा जा चुका था। मगर जब गोदाम का ताला खुला तो वहां सिर्फ 384 बोरी धान ही रखा मिला। वजन करने पर यह सिर्फ 134 क्विंटल निकला।
मतलब सीधा हिसाब, कागज पर जितना धान होना चाहिए था और जितना मिला, उसके बीच 4 हजार 885 बोरी यानी 3 हजार 682 क्विंटल धान का अंतर पाया गया।
सरकारी रेट के हिसाब से इस गायब धान की कीमत 1 करोड़ 14 लाख 47 हजार 308 रुपये आंकी गई।
कौन हैं आरोपी ?
पुलिस जांच में सामने आया कि इस गबन में केंद्र से जुड़े तीन लोगों की मिलीभगत थी। कोरर पुलिस ने तीनों के खिलाफ BNS 2023 की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।
नामजद आरोपी:
1. देवानंद जैन – तालगुड़ी का रहने वाला, केंद्र का खरीदी प्रभारी
2. सन्ना अली – कांकेर का कंप्यूटर ऑपरेटर, जिस पर एंट्री का काम था
3. भूपेन्द्र सलाम – कन्हारपुरी, कांकेर
आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर फर्जी एंट्री की, धान का गबन किया और शासन को करोड़ों की चपत लगाई।
पुलिस ने क्या कहा ?
12 जुलाई को कोरर थाने में अपराध दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट को भी केस की फाइल में लगाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गबन की रकम की वसूली और बाकी लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद क्षेत्र के किसानों में नाराजगी है। उनका कहना है कि किसानों के पसीने की कमाई का धान इस तरह गायब हो जाना बेहद गलत है।
FAQ:
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की कैसी है व्यवस्था?
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी की व्यवस्था अत्यधिक डिजिटल और पारदर्शी है [1, 2, 3]। राज्य में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹3,100 प्रति क्विंटल है, जो देश में सबसे अधिक है। वहीं, प्रति एकड़ धान खरीदी की अधिकतम सीमा 21 क्विंटल निर्धारित की गई है।
धान खरीदी केंद्रों में घोटाले का क्या तरीका प्रचलित है?
धान खरीदी केंद्रों में घोटाले के लिए बिचौलिए, राइस मिलर और केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत से मुख्य रूप से फर्जी किसान पंजीकरण, गिरदावरी में हेराफेरी, पड़ोसी राज्यों से सस्ता धान लाकर खपाना, तौल में गड़बड़ी और कागजों में धान की खरीद दिखाकर उसे गायब कर देने (चूहे/मौसम के नाम पर) जैसे हथकंडे अपनाए जाते हैं।
इस वर्ष कितने जिलों में धान घोटाले उजगार हुए ?
छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक राज्य के कबीरधाम (कवर्धा), महासमुंद, राजनांदगांव, और कांकेर जैसे प्रमुख जिलों में धान खरीदी केंद्रों से करोड़ों रुपये का धान गायब होने और गड़बड़ी के मामले उजागर हुए हैं


