CG Monsoon: छत्तीसगढ़ में मानसून की गतिविधियां लगातार जारी हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा 21 जुलाई 2026 की स्थिति में जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 1 जून से अब तक औसतन 356.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है। यह इस अवधि की सामान्य औसत वर्षा 408.7 मिलीमीटर का लगभग 87.1 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों के दौरान पूरे प्रदेश में औसतन 21.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जिसमें गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला 69.4 मिलीमीटर बारिश के साथ सबसे आगे रहा है।
जिलोंवार बारिश के आंकड़े
सत्र की कुल बारिश के लिहाज से मैदानी और मध्य-छत्तीसगढ़ के जिलों में स्थिति काफी बेहतर बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला 576.7 मिलीमीटर बारिश के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है, जो सामान्य औसत का 181.4 प्रतिशत है। इसके अलावा जांजगीर-चांपा में 512.0 मिमी, बलौदाबाजार में 453.4 मिमी, बिलासपुर में 440.5 मिमी, महासमुंद में 427.3 मिमी, मुंगेली में 417.7 मिमी और राजधानी रायपुर में 395.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। उत्तरी छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में भी 391.8 मिमी पानी गिर चुका है, जो सामान्य का 160 प्रतिशत है। इसके विपरीत, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला 203.3 मिलीमीटर बारिश के साथ सबसे निचले पायदान पर है, जो इसके सामान्य औसत का महज 40.4 प्रतिशत है। दक्षिणी सीमांत जिलों जैसे सुकमा, बीजापुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर में भी औसत से कम बारिश दर्ज की गई है।
छत्तीसगढ़ में हर साल मानसून का प्रभाव क्षेत्रीय विविधताओं के आधार पर अलग-अलग रहता है। भौगोलिक स्थिति के कारण मध्य और मैदानी इलाकों में जहां अच्छी बारिश दर्ज की जाती है, वहीं कई बार दक्षिणी या पहाड़ी जिलों में मानसूनी ट्रफ की स्थिति के चलते पानी कम बरसता है। पिछले कुछ वर्षों के मौसम पैटर्न को देखें तो जुलाई के महीने में राज्य के विभिन्न संभागों में बारिश के आंकड़ों में इस तरह का उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन तंत्र इन सभी आंकड़ों की नियमित निगरानी करता है ताकि कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े फैसले समय पर लिए जा सकें।
प्रशासनिक और मौसम विभाग का आधिकारिक रुख
आपदा प्रबंधन विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राज्य के सभी जिलों में बारिश की स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। जिन जिलों में औसत से कम वर्षा हुई है, वहां की कृषि गतिविधियों और जलस्तर पर विशेष रूप से नजर रखी जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में मानसूनी हवाओं के सक्रिय होने से उन क्षेत्रों में भी बारिश का कोटा पूरा होने की पूरी संभावना है, जहां अब तक सूखा जैसी स्थिति बनी हुई है।
जनजीवन, कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इस मानसूनी बारिश का सीधा असर राज्य की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। धान के कटोरे कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में खरीफ की फसल, विशेषकर धान की रोपाई के लिए यह बारिश बेहद महत्वपूर्ण है। जिन जिलों में अच्छी बारिश हुई है, वहां किसानों ने रोपाई का काम तेजी से शुरू कर दिया है। हालांकि, जिन जिलों में बारिश का प्रतिशत कम है, वहां के किसानों को अभी भी अच्छी बरसात का इंतजार है, जिसका असर आने वाले समय में कृषि उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
संक्षेप में कहें तो, छत्तीसगढ़ में मानसून का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में जहां लक्ष्य से अधिक बारिश हो चुकी है, वहीं दक्षिणी और कुछ अन्य जिलों में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। मौसम विभाग द्वारा आने वाले दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में नए स्पेल की संभावना जताई जा रही है, जिसकी हर नई अपडेट समय पर मिलती रहेगी।
(FAQs) अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक कितनी औसत बारिश दर्ज की गई है?
प्रदेश में अब तक औसतन 356.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है।
- सबसे अधिक बारिश किस जिले में दर्ज की गई है?
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला 576.7 मिलीमीटर बारिश के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है।
- बीते 24 घंटों में सबसे आगे कौन-सा जिला रहा है?
बीते 24 घंटों में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला 69.4 मिलीमीटर बारिश के साथ सबसे आगे रहा है।
- सबसे कम बारिश किस जिले में दर्ज हुई है?
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला सबसे कम 203.3 मिलीमीटर बारिश के साथ सबसे निचले पायदान पर है।
- यह आंकड़े किसके द्वारा जारी किए गए हैं?
यह आंकड़े राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा जारी किए गए हैं।



