Anna Hazare Strike: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी का जोरदार प्रदर्शन लगातार जारी रहा, जहां सुबह से ही हजारों की संख्या में लोग जमा हैं। छात्रों और प्रदर्शनकारियों के इस आंदोलन को बड़ा समर्थन देते हुए वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में अनिश्चितकालीन मौन आंदोलन शुरू कर दिया है। इस बीच, आंदोलन के कारण दिल्ली की प्रमुख सड़कों पर बने यातायात जाम और आम जनता को हो रही दिक्कतों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिस पर शुक्रवार को अहम सुनवाई होगी।
जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में गुरुवार सुबह से तनाव और बढ़ गया। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि सत्तारूढ़ दल द्वारा भेजे गए उपद्रवी प्रदर्शनकारियों के बीच घुसकर पत्थरबाजी कर रहे हैं और शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं। दूसरी ओर, महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में मौन व्रत पर बैठे अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जनता व छात्रों की मांगों पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। अन्ना हजारे का कहना है कि प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च नेता हैं, इसलिए नागरिकों की आवाज उन तक पहुंचना लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद जरूरी है।
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका
इस आंदोलन की शुरुआत युवाओं और छात्रों से जुड़ी मांगों को लेकर हुई थी, जो बीते कुछ दिनों से राष्ट्रीय राजधानी में अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। हालांकि, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हजारों लोगों के जुटने से मध्य दिल्ली के कई रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो गए हैं। सड़कों पर बैरिकेडिंग और लोगों के हुजूम के कारण आम शहरियों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी अव्यवस्था को आधार बनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली को एक तरह से बंधक बना लिया है।

अन्ना हजारे ने क्या कहा ?
लोकतंत्र में जनता और छात्रों की मांगों को सुनना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। देश के सर्वोच्च नेता होने के नाते प्रधानमंत्री को इन मुद्दों का समाधान निकालना चाहिए। जब तक नागरिकों की जायज मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह मौन आंदोलन जारी रहेगा।
यातायात प्रभावित
जंतर-मंतर पर चल रहे इस बड़े जमावड़े का सीधा असर राजधानी के ट्रैफिक और आसपास के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ रहा है। लुटियंस दिल्ली से सटे इलाकों में भारी जाम की स्थिति बनी हुई है, जिससे दफ्तर जाने वाले यात्रियों और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यदि शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से प्रदर्शनकारियों को हटाने या रास्ता साफ करने संबंधी कोई कड़ा निर्देश आता है, तो पुलिस प्रशासन को जंतर-मंतर खाली कराने के लिए कड़ा रुख अपनाना पड़ सकता है, जिससे स्थिति और संवेदनशील होने के आसार हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: जंतर-मंतर पर कौन सी पार्टी प्रदर्शन कर रही है?
Ans: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके की अगुवाई में हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।
Q2: अन्ना हजारे ने किस जगह और क्यों मौन आंदोलन शुरू किया है?
Ans: अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मांगों के समर्थन में मौन आंदोलन शुरू किया है।
Q3: दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में क्या मांग की गई है?
Ans: याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली की सड़कें बंद हो गई हैं और आम नागरिकों को बंधक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए रास्ते खुलवाए जाएं।
Q4: जंतर-मंतर आंदोलन में पत्थरबाजी के क्या आरोप लगे हैं?
Ans: पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि बाहरी उपद्रवियों ने भीड़ में घुसकर माहौल बिगाड़ने के लिए पत्थरबाजी की है।
Q5: इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई कब होगी?
Ans: दिल्ली हाईकोर्ट इस जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा।


