8th pay commission: नई दिल्ली। लंबे समय से 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का इंतजार कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। नए वेतन आयोग के दूसरे दौर की बैठकें अगले महीने यानी अगस्त से शुरू होने जा रही हैं। इन बैठकों में कर्मचारियों की सैलरी, फिटमेंट फैक्टर और अन्य मांगों पर विस्तार से चर्चा होगी।
बैठकों का शेड्यूल और तारीखें
आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, बैठकें देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित की जाएंगी:
- दिल्ली बैठक (7 से 10 अगस्त): अगस्त महीने में राजधानी दिल्ली में आयोग की बैठक होगी, जहां अधिकारी विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और उनके संगठनों के साथ बातचीत करेंगे और उनके सुझावों पर मंथन करेंगे। इसके लिए कर्मचारी संगठनों को 31 जुलाई तक अपना समय बुक कराना होगा।
- चेन्नई बैठक (7-8 सितंबर): दिल्ली के बाद चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को बैठक प्रस्तावित है। इसमें शामिल होने के लिए कर्मचारी संगठनों को 18 अगस्त तक का समय दिया गया है।
- पुडुचेरी बैठक (9 सितंबर): इसके बाद 9 सितंबर को पुडुचेरी में वेतन आयोग की अगली बैठक होगी।
फिटमेंट फैक्टर को लेकर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
वेतन बढ़ोतरी को लेकर सबसे बड़ा पेच ‘फिटमेंट फैक्टर’ पर फंसा हुआ है। जानकारों के अनुसार, 3.83 के करीब फिटमेंट फैक्टर तय करने से केंद्र और राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
- संभावित आंकड़े: कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर 2.0 और 2.1 के बीच तय हो सकता है, जबकि कुछ का यह भी अनुमान है कि वित्तीय स्थिति ठीक रहने पर यह मौजूदा 2.57 के आसपास भी रह सकता है।
- 1.83 का फैक्टर भी देगा राहत: 1.83 का फिटमेंट फैक्टर भी सैलरी और पेंशन में अच्छी बढ़ोतरी दे सकता है, हालांकि यह कर्मचारियों की 69,000 रुपये की अधिकतम मांग के आसपास भी नहीं होगा।
कैसे तय होती है नई सैलरी?
आम धारणा यह होती है कि वेतन आयोग सीधे नई सैलरी की घोषणा कर देता है, लेकिन प्रक्रिया काफी लंबी होती है। आयोग मंत्रालयों, विभागों, कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स संगठनों और विषय विशेषज्ञों से राय लेता है। इसी कड़ी में सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने से पहले आयोग विभिन्न शहरों में जाकर कर्मचारियों के सुझाव ले रहा है।
कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?
आठवें वेतन आयोग को जनवरी 2025 में नोटिफाई किया गया था और शुरुआत में इसके 1 जनवरी, 2026 से लागू होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके तुरंत रोलआउट होने की संभावना कम है।
पूर्व के वेतन आयोगों के इतिहास को देखें तो सरकार की मंजूरी और अंतिम रिपोर्ट आने में आमतौर पर दो से तीन साल का समय लग जाता है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को अपनी संशोधित (Revised) सैलरी देखने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, यदि इसे पिछली तारीख (Retrospective date) से लागू किया जाता है, तो योग्य कर्मचारियों को बीच की अवधि का एरियर (Arrears) भी मिल सकेगा।


