बिलासपुर। सर्पदंश से मौत पर मिलने वाले करोड़ों के मुआवजे में हुए फर्जीवाड़े की जांच तेज हो गई है। बिलासपुर पुलिस ने मामले में 5 नायब तहसीलदारों और 5 राजस्व लिपिकों को नोटिस भेजकर बयान दर्ज कराने तलब किया है। लेकिन नोटिस के बावजूद अभी तक किसी का बयान दर्ज नहीं हो सका है, जिससे जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

क्या है पूरा मामला?

राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर “सर्पदंश से मृत्यु” दिखाकर प्राकृतिक आपदा राहत मद से मुआवजा स्वीकृत कराया था। विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद FIR दर्ज हुई। इसमें वकील, डॉक्टर, राजस्व कर्मी और बिचौलिए आरोपी बनाए गए। अब तक 19 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

पुलिस किसकी भूमिका जांच रही है?

पुलिस उन नायब तहसीलदारों और लिपिकों से पूछताछ कर रही है जिनके क्षेत्र में फर्जी पंचनामे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा पास हुआ। 

नोटिस भेजे गए थाने: सिटी कोतवाली, सिविल लाइन, सरकंडा, सिरगिट्टी और कोनी

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सरकंडा थाने से नोटिस मिलने पर तहसील के 4 लिपिक पहुंचे भी थे, लेकिन किसी कारणवश उनके बयान दर्ज नहीं हो पाए।

जांच पर उठ रहे सवाल

1.  दस्तावेजों का मिलान बाकी: पुलिस अभी तथ्यों और दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है।

2.  निष्पक्षता पर सवाल: जिन थाना प्रभारियों ने शुरुआती जांच में गड़बड़ी नहीं पकड़ी, वही अब जांच कर रहे हैं। इसलिए स्वतंत्र एजेंसी या SIT से जांच की मांग उठ रही है।

3.  3 सदस्यीय समिति: प्रारंभिक जांच में तत्कालीन तहसीलदार प्रकाश साहू, CMHO डॉ. श्रीकेश कुमार गुप्ता और थाना प्रभारी शामिल थे। किसी ने आपत्ति नहीं दर्ज की।

पुलिस के मुताबिक फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पंचनामों के आधार पर ही मुआवजा स्वीकृत किया गया था। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत मानी जा रही है।

FAQ: सर्पदंश मुआवजा घोटाला बिलासपुर

सवाल 1. घोटाला किस चीज का है?

सर्पदंश से मृत्यु दिखाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी मुआवजा लेना।

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सवाल 2. अब तक कितने लोग गिरफ्तार?

19 लोग – इसमें वकील, डॉक्टर, राजस्व कर्मचारी और बिचौलिए शामिल हैं।

सवाल 3. नए नोटिस किसे मिले हैं?

5 नायब तहसीलदार और 5 राजस्व लिपिक। ये सभी उन क्षेत्रों से हैं जहां फर्जी केस स्वीकृत हुए।

सवाल 4. जांच क्यों धीमी है?

नोटिस मिलने के बाद भी अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज नहीं हो पाए हैं। दस्तावेजों का मिलान भी बाकी है।

सवाल 5. प्रशासन क्या मांग कर रहा है?

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग।