लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक पर अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा।
लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक पर अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा।

Parliament Session: लोकसभा में पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। नीट-यूजी 2026 परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और देशव्यापी छात्र आंदोलन का हवाला देते हुए उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसा।

‘एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया’

अखिलेश यादव ने कहा कि करोड़ों युवाओं के भारी दबाव के आगे अंततः सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा, “सरकार को लगता था कि वह कभी नहीं झुकेगी, लेकिन युवाओं के आंदोलन ने साबित कर दिया कि झुकाने वाला चाहिए, सरकार भी झुकती है। सरकार ने एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया।”

उन्होंने मांग की कि छात्र आंदोलन के दौरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों से जो भी वादे और समझौते किए हैं, उन्हें संसद के पटल पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

पेपर लीक और NTA की आउटसोर्सिंग पर तीखे सवाल

सपा प्रमुख ने कहा कि वर्ष 2024 में भी पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाया गया था। इसके बावजूद NEET-UG 2026 जैसी बड़ी परीक्षा में धांधली होना कानून के निष्प्रभावी होने का सबूत है।

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उन्होंने दरोगा भर्ती, सिपाही भर्ती, लेखपाल, यूपीटीईटी और बोर्ड परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में कई परीक्षाएं रद्द हुईं।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह पूरी परीक्षा प्रक्रिया आउटसोर्स हो चुकी है, विपक्ष को डर है कि कहीं पूरी सरकार ही न आउटसोर्स हो जाए।

प्राथमिक विद्यालयों के बंद होने और शिक्षा नीति पर आरोप

सपा सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण करने और उसे कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आंकड़े रखते हुए कहा कि देश में 1 लाख से अधिक और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 26,386 सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद किए गए हैं, जिससे सबसे अधिक नुकसान गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को हुआ है।

किरेन रिजिजू के साथ तीखी बहस और मुआवजा मांग

चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जब सवाल किया कि क्या सरकार का कानून लाना बेहतर है या आपातकाल लगाना, तो अखिलेश ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने आपातकाल नहीं देखा, लेकिन दिल्ली की सड़कों पर छात्रों पर आंसू गैस, नुकीले बैरिकेड्स और पुलिसिया कार्रवाई जरूर देखी है।

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भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि केवल नया कानून बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार की नीयत साफ होनी चाहिए। उन्होंने NEET विवाद के कारण जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की।

(FAQs)

प्र.1: अखिलेश यादव ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या तंज कसा?

उ: अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि NEET-UG 2026 छात्र आंदोलन के दबाव में सरकार ने “एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया।”

प्र.2: संसद में अखिलेश यादव ने NTA और परीक्षा प्रणाली को लेकर क्या आशंका जताई?

उ: उन्होंने NTA में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह परीक्षा प्रक्रियाएं आउटसोर्स हो रही हैं, कहीं आगे चलकर पूरी सरकार ही आउटसोर्स न हो जाए।

प्र.3: उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक स्कूलों को लेकर अखिलेश यादव ने क्या आंकड़ा प्रस्तुत किया?

उ: उन्होंने दावा किया कि देश में 1 लाख से अधिक सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद हुए हैं, जिनमें सबसे अधिक 26,386 स्कूल अकेले उत्तर प्रदेश में बंद किए गए हैं।

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प्र.4: किरेन रिजिजू के आपातकाल वाले सवाल पर अखिलेश यादव का क्या जवाब था?

उ: अखिलेश ने कहा कि उन्होंने भले ही आपातकाल न देखा हो, लेकिन दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ आंसू गैस, नुकीले बैरिकेड्स और सख्ती जैसी स्थिति देखी है, जो किसी आपातकाल से कम नहीं थी।

प्र.5: NEET-UG विवाद से प्रभावित मृतक छात्रों के परिवारों के लिए अखिलेश यादव ने क्या मांग रखी?

उ: उन्होंने मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अपनी जान गंवाने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को सरकार की ओर से 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।