Surajpur। Global Tiger Day के दिन ही छत्तीसगढ़ में वन्यजीव तस्करों पर बड़ा प्रहार हुआ है। मध्य प्रदेश के जबलपुर से पहुंची WCCB यानी वाइल्ड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने सूरजपुर वन विभाग के साथ मिलकर ओड़गी-भैयाथान के बीच धरसेड़ी गांव में छापा मारकर बाघ की असली खाल बरामद की है। इस दौरान मौके से 5 तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद वन विभाग को शक है कि इस पूरे मामले के पीछे एक बड़ा अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क सक्रिय है।
कैसे हुई पूरी कार्रवाई
WCCB की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ तस्कर सूरजपुर जिले के धरसेड़ी क्षेत्र में बाघ की खाल बेचने के लिए आने वाले हैं। सूचना मिलते ही जबलपुर से आई WCCB टीम और सूरजपुर वन विभाग ने मिलकर इलाके में घेराबंदी की।
टीम को देखकर तस्करों ने भागने की कोशिश की, लेकिन वन कर्मियों ने घेरकर पांचों आरोपियों को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से बाघ की पूरी खाल मिली जिसे तुरंत जब्त कर लिया गया।
कुछ रिपोर्ट्स में 3 संदिग्धों के हिरासत में होने का भी जिक्र है। फिलहाल सभी से बारी-बारी से पूछताछ की जा रही है।
तस्करी के पीछे किसका हाथ ?
वन विभाग और WCCB अधिकारियों का मानना है कि ये सिर्फ छोटे-मोटे तस्कर नहीं हैं। इतनी महंगी और संरक्षित खाल को बेचने के लिए एक संगठित गिरोह की जरूरत होती है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार छत्तीसगढ़ के बाहर दूसरे राज्यों तक फैले हो सकते हैं। पकड़े गए आरोपियों से अब यही निकलवाने की कोशिश हो रही है कि खाल किसे बेची जानी थी और सौदा कितने में तय हुआ था।
बाघ का शिकार कहां हुआ ?
पूछताछ का सबसे अहम बिंदु यही है कि बाघ का शिकार आखिर कहां किया गया। अधिकारियों को शक है कि शिकार गुरु घासीदास नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के इलाके में हुआ होगा।
खाल को फॉरेंसिक और DNA जांच के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि बाघ किस क्षेत्र का था और उसकी उम्र कितनी थी।
छत्तीसगढ़ में बढ़ रहे बाघ शिकार के मामले
ये मामला इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि पिछले सिर्फ 4 महीनों में राज्य में बाघ शिकार का ये 5वां मामला सामने आया है।
इससे पहले दंतेवाड़ा में 1 बाघ और बीजापुर में 3 बाघों के शिकार के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। लगातार हो रही घटनाओं से साफ है कि बस्तर और सरगुजा संभाग में वन्यजीव तस्कर सक्रिय हैं।
WCCB और वन विभाग आगे क्या करेंगे ?
WCCB देशभर में वन्यजीवों की अवैध तस्करी रोकने वाली शीर्ष एजेंसी है। बरामद खाल की जांच के साथ-साथ टीम ये पता लगाएगी कि आरोपियों का संपर्क किन-किन लोगों से था।
वन विभाग के अधिकारी भी मामले से जुड़े हर पहलू की जांच कर रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत बाघ का शिकार करना और उसके अंगों की खरीद-बिक्री करना गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। दोषी पाए जाने पर लंबी जेल और भारी जुर्माना हो सकता है।
FAQ: सूरजपुर बाघ खाल तस्करी मामला
सवाल 1. कार्रवाई कब और कहां हुई ?
28 जुलाई 2026, Global Tiger Day के दिन सूरजपुर जिले के ओड़गी-भैयाथान मार्ग पर स्थित धरसेड़ी गांव में WCCB और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।
सवाल 2. कितने आरोपी पकड़े गए और क्या मिला ?
टीम ने मौके से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से बाघ की असली खाल बरामद की गई है।
सवाल 3. जांच टीम को किस बात का शक है ?
अधिकारियों को शक है कि इस मामले में एक बड़ा अंतरराज्यीय तस्करी रैकेट शामिल है। बाघ का शिकार गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व क्षेत्र में होने की संभावना जताई जा रही है।
सवाल 4. छत्तीसगढ़ में इस साल कितने मामले सामने आए ?
पिछले चार महीने में ये राज्य में बाघ शिकार का पांचवां मामला है। दंतेवाड़ा और बीजापुर के बाद अब सूरजपुर में कार्रवाई हुई है।
सवाल 5. आगे क्या जांच होगी ?
WCCB अब खाल की फॉरेंसिक जांच कराएगी और आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश करेगी।


