मनेंद्रगढ़/खडगांव। छत्तीसगढ़ सरकार की फ्लैगशिप योजना सरस्वती साइकिल योजना एमसीबी जिले में पूरी तरह फेल होती दिख रही है। यहां पीएम श्री एकलव्य आवासीय विद्यालय, खडगांव के परिसर में लाखों रुपये की सरकारी साइकिलें खुले आसमान के नीचे पड़ी बारिश, कीचड़ और धूप में खराब हो रही हैं। जिम्मेदार अधिकारी अब सिर्फ सफाई और गोल-मोल जवाब दे रहे हैं।

खबर में नजर आ रही ये तस्वीरें एमसीबी जिले के पीएम श्री एकलव्य आवासीय विद्यालय की हैं, जहां शासन की सरस्वती साइकिल योजना की साइकिलों को सुरक्षित गोदाम में रखने के बजाय खुले मैदान में छोड़ दिया गया है। तेज बारिश, कीचड़ और नमी के बीच पड़ी इन साइकिलों के हैंडल, चेन, रिग और अन्य लोहे के हिस्सों पर जंग लगना शुरू हो गया है। इतना ही नहीं, साइकिलों के ऊपर अन्य सामान भी रख दिया गया है, जिससे उनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा और बढ़ गया है।

मैदान में पड़ी हैं 50+ साइकिलें, लग चुका है जंग

एमसीबी जिले के खडगांव एकलव्य स्कूल सरस्वती योजना के तहत आई नई साइकिलों को सुरक्षित स्टोर रूम में रखने के बजाय सीधे स्कूल के खुले मैदान में फेंक दिया गया। लगातार हो रही मानसूनी बारिश की वजह से साइकिलों के हैंडल, चेन, रिम, पैडल और फ्रेम पर जंग लग चुकी है। कई साइकिलों के टायर भी पंक्चर हो गए हैं। सबसे हैरानी की बात ये कि कुछ साइकिलों के ऊपर बेंच, डेस्क और अन्य कबाड़ भी रख दिया गया है।

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700 नई साइकिलें भी बिना शेड के, छात्राएं अब भी पैदल

खंड शिक्षा अधिकारी रामा निवास मिश्रा ने माना कि परिसर में रखी साइकिलें पिछले सत्र 2025-26 की हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि नए सत्र 2026-27 की करीब 700 साइकिलें भी स्कूल पहुंच चुकी हैं और उन्हें भी फिलहाल बाहर ही रखा गया है। यानी कुल मिलाकर 750 के आसपास साइकिलें बारिश के हवाले हैं।  

वहीं दूसरी ओर जिले की दूरस्थ गांवों की छात्राएं अब भी 3-4 किमी पैदल चलकर स्कूल आ रही हैं। उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। अब तक उन्हें साइकिलें नहीं मिली हैं।

जिम्मेदारी किसकी? नियम क्या कहता है ?

सरस्वती साइकिल योजना के नियमों के अनुसार साइकिलें आते ही 15 दिन के भीतर छात्राओं को वितरित कर देनी होती हैं। अगर स्टोर नहीं है तो अस्थायी शेड या तिरपाल की व्यवस्था करना BEO और प्राचार्य की जिम्मेदारी है, लेकिन यहां न तो समय पर वितरण हुआ, न ही बचाव की कोई व्यवस्था।

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BEO का बयान: “मरम्मत कराकर बांट देंगे”

BEO रामा निवास मिश्रा ने कहा, “साइकिलें पुरानी हैं। बारिश से जो खराब हुई हैं उनकी मरम्मत कराकर जल्द वितरण कर दिया जाएगा।” लेकिन सवाल ये है कि पहले सरकारी संपत्ति को खराब होने दिया जाए, फिर जनता के पैसे से उसकी मरम्मत कराई जाए, क्या यही योजना का मकसद था? एक नई साइकिल की कीमत करीब 3500 से 4000 रुपये है। ऐसे में 700 साइकिलों का मतलब लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति खतरे में है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों में आक्रोश

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल यही होता है। साइकिलें आती हैं, फोटो खिंचती है और फिर गोदाम या मैदान में सड़ती रहती हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर रिकवरी की कार्रवाई हो।

FAQ: एमसीबी सरस्वती साइकिल लापरवाही मामला

सवाल 1. सरस्वती साइकिल योजना का उद्देश्य क्या है ?

9वीं से 12वीं तक की छात्राओं को घर से स्कूल आने-जाने में सुविधा देने के लिए मुफ्त साइकिल देना। ताकि ड्रॉपआउट रेट कम हो।

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सवाल 2. एमसीबी में कितनी साइकिलें प्रभावित हैं ?

पिछले साल की 50 और इस साल की 700, कुल लगभग 750 साइकिलें खुले में रखी हैं।

सवाल 3. खराब होने की मुख्य वजह क्या है ?

सुरक्षित भंडारण न होना, गोदाम न होना, समय पर वितरण न करना और बारिश में खुले में छोड़ देना।

सवाल 4. अधिकारी पर क्या कार्रवाई होगी ?

अभी सिर्फ बयानबाजी हुई है। शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होगी। ग्रामीण रिकवरी की मांग कर रहे हैं।

सवाल 5. एक साइकिल की अनुमानित लागत कितनी है ?

बाजार में एक साइकिल की कीमत 3500 से 4000 रुपये तक है। इस हिसाब से लाखों की संपत्ति दांव पर है।