Devendra Mahato Hunger Strike: झारखंड की राजधानी रांची में पिछले कई दिनों से अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद अनशन के दौरान पानी पी लिया है। मंगलवार को सामने आई इस जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई थी, जिसके बाद देवेंद्र महतो ने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए पानी पीने का फैसला किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अभी भी अन्न ग्रहण नहीं कर रहे हैं और उनका विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक की अपील और बातचीत का असर
देवेंद्र महतो ने खुद इस बात की जानकारी दी कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से उनकी बातचीत हुई थी। बातचीत के दौरान वांगचुक ने उनसे अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की थी।
महतो के अनुसार, सोनम वांगचुक ने उन्हें दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन का उदाहरण भी दिया। वांगचुक ने बताया कि उस दौरान उन्होंने भी पानी और नमक का सेवन करते हुए अपना आंदोलन जारी रखा था। पहले देवेंद्र पानी पीने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे, लेकिन सोनम वांगचुक के कैमरे पर किए गए विशेष आग्रह के बाद उन्होंने एक शर्त पर पानी पीना स्वीकार किया।
अन्न त्याग जारी, संघर्ष रहेगा जारी
पानी पीने के बावजूद देवेंद्र महतो ने अपनी मांगें स्पष्ट रखी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं और छात्रों की मांगों पर पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई करनी होगी। पानी पीने का फैसला भले ही स्वास्थ्य कारणों और सोनम वांगचुक के आग्रह पर लिया गया हो, लेकिन उन्होंने अन्न का त्याग अभी समाप्त नहीं किया है। रांची में चल रहे इस अनशन को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बनी हुई है।
5 FAQs
रांची में अनशन पर कौन बैठा है?
रांची में पिछले कई दिनों से देवेंद्र महतो अनशन पर बैठे हुए हैं।
देवेंद्र महतो ने पानी पीने का फैसला क्यों लिया?
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ हुई सकारात्मक बातचीत और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील के बाद उन्होंने पानी पिया।
क्या देवेंद्र महतो ने अपना पूरा अनशन समाप्त कर दिया है?
नहीं, उन्होंने केवल पानी पिया है, लेकिन वे अभी भी अन्न ग्रहण नहीं कर रहे हैं और उनका विरोध जारी है।
सोनम वांगचुक ने उन्हें क्या उदाहरण दिया?
वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन का जिक्र किया जिसमें उन्होंने खुद पानी और नमक लेकर आंदोलन जारी रखा था।
देवेंद्र महतो की क्या शर्त है?
उन्होंने कहा है कि सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से और तुरंत कार्रवाई करनी होगी।


