H-1B visa extension fee US: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B और L-1 वीजा की अवधि बढ़ाने (एक्सटेंशन) की प्रक्रिया को और महंगा करने की योजना बनाई है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) के रेगुलेटरी एजेंडा के मुताबिक, इसके तहत वर्क वीजा बढ़ाने की याचिकाओं पर भी 9-11 रिस्पॉन्स और बायोमेट्रिक एंट्री-एक्जिट फीस लागू की जाएगी।
इस कदम से उन बड़ी अमेरिकी और मल्टीनेशनल कंपनियों का खर्च काफी बढ़ जाएगा, जो विदेशी कुशल कर्मचारियों और हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स पर निर्भर हैं।
अभी क्या नियम हैं और क्या बदलाव होने वाला है?
अमेरिका में मौजूदा नियमों के अनुसार, जिन कंपनियों में 50 से अधिक कर्मचारी हैं और उनमें से आधे से ज्यादा के पास H-1B या L-1 वीजा है, उन्हें शुरुआती याचिका दाखिल करने या नियोक्ता बदलने पर H-1B के लिए 4,000 डॉलर और L-1 के लिए 4,500 डॉलर का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।
डीएचएस के नए नियमों और स्पष्टीकरण के तहत अब यह प्रावधान किया जा रहा है कि 9-11 रिस्पॉन्स फीस सभी H-1B और L-1 एक्सटेंशन याचिकाओं पर भी अनिवार्य रूप से लागू होगी। आमतौर पर H-1B वीजा धारकों को शुरुआती तीन साल के प्रवास के बाद अपना वीजा बढ़वाने की आवश्यकता होती है, जिससे कंपनियों के इमिग्रेशन खर्च में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
अदालती मामला और टेक कंपनियों पर इसका असर
यह नया प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन को हाल ही में मिली एक कानूनी हार के बाद सामने आया है, जब अमेरिकी फेडरल अपील्स कोर्ट ने नए H-1B वीजा पर प्रस्तावित 1,00,000 डॉलर की फीस को रद्द करने वाले निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
इस प्रस्तावित बदलाव का सीधा असर गूगल, मेटा जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों पर पड़ेगा, जो अपने अमेरिकी ऑपरेशन्स के लिए एग्जीक्यूटिव, मैनेजर और विशेष जानकारी वाले कर्मचारियों को भेजने हेतु L-1 वीजा का उपयोग करती हैं। इसके अलावा, यह उन टेक और आईटी सर्विस फर्मों को भी प्रभावित करेगा जो विदेशी टैलेंट पर भारी मात्रा में निर्भर हैं।
भारतीय कर्मचारियों और बड़ी कंपनियों पर इसका कितना असर होगा?
इस नीतिगत बदलाव का सबसे ज्यादा असर अमेरिका में काम कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि हर साल मिलने वाले अधिकांश H-1B एक्सटेंशन इन्हीं को दिए जाते हैं। यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में कुल 406,685 H-1B याचिकाएं मंजूर की गईं।
इनमें से 71 प्रतिशत मंजूरियां (291,542 अर्जियां) पहले से चल रहे रोजगार को जारी रखने यानी रिन्यूअल के लिए थीं। इन रिन्यूअल मंजूरियों में से 226,359 अकेले भारतीय नागरिकों को मिलीं, जो कुल H-1B रिन्यूअल का 77.6 प्रतिशत है। इसके बाद चीन को 31,581 मंजूरियां प्राप्त हुईं। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के डेटा के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में नौकरी जारी रखने के लिए सबसे ज्यादा H-1B मंजूरियां पाने वाली कंपनियों में अमेजन (14,532), टीसीएस (5,293), माइक्रोसॉफ्ट (4,863), मेटा (4,740), एप्पल (4,610) और गूगल (4,509) शामिल हैं।
5 FAQs
अमेरिका में कौन से वीजा की अवधि बढ़ाने को महंगा करने की योजना है?
ट्रंप प्रशासन H-1B और L-1 वीजा की अवधि बढ़ाने (एक्सटेंशन) की प्रक्रिया को महंगा करने की योजना बना रहा है।
किन नई फीस को वीजा एक्सटेंशन पर लागू किया जाएगा?
प्रस्तावित नियमों के तहत 9-11 रिस्पॉन्स और बायोमेट्रिक एंट्री-एक्जिट फीस को सभी H-1B और L-1 एक्सटेंशन याचिकाओं पर लागू किया जाएगा।
वित्त वर्ष 2025 में कितने भारतीय नागरिकों को H-1B रिन्यूअल मंजूरियां मिलीं?
USCIS के डेटा के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में 226,359 भारतीय नागरिकों को H-1B रिन्यूअल मंजूरियां मिलीं, जो कुल रिन्यूअल का 77.6 प्रतिशत है।
किन बड़ी कंपनियों को इस बदलाव से सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
अमेजन, टीसीएस, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, एप्पल और गूगल जैसी कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है जो H-1B और L-1 कर्मचारियों पर निर्भर हैं।
मौजूदा नियमों में 50 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों के लिए क्या प्रावधान है?
ऐसी कंपनियों को शुरुआती याचिका या नियोक्ता बदलने पर H-1B के लिए 4,000 डॉलर और L-1 के लिए 4,500 डॉलर का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।


