Railway: दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में से एक, भारतीय रेलवे (IR) ने यात्री आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। कभी लंबी-लंबी कतारों और मैन्युअल रजिस्टरों पर निर्भर रहने वाली रेलवे टिकटिंग व्यवस्था आज अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर रफ्तार भर रही है। प्रत्येक आरक्षित टिकट के पीछे यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS) काम करती है, जो पिछले चार दशकों से भारतीय रेलवे टिकटिंग की तकनीकी रीढ़ बनी हुई है।
वर्ष 1986 में पेश की गई कम्प्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS) ने सबसे पहले काउंटर-आधारित मैन्युअल रजिस्टरों की जगह ली। इसके बाद 1990 के दशक में PRS का विस्तार अलग-अलग रेलवे ज़ोन में हुआ और ‘कम्प्यूटरीकृत उन्नत आरक्षण और टिकटिंग के लिए देशव्यापी नेटवर्क’ (CONCERT) के जरिए पूरे देश के टिकटिंग सेटअप को एक दूसरे से जोड़ दिया गया।
65.08 करोड़ आरक्षित टिकटों में 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक
वर्ष 2002 में इंटरनेट बुकिंग की शुरुआत ने क्रांति ला दी, जिससे टिकट बुकिंग काउंटरों से निकलकर यात्रियों के घरों तक पहुँच गई। 2014 में ‘नेक्स्ट जनरेशन ई-टिकटिंग’ (NGET) प्रणाली और फिर 2017 में ‘रेलकनेक्ट’ मोबाइल ऐप लाया गया। जून 2025 से जून 2026 के बीच यात्रियों द्वारा बुक किए गए कुल 65.08 करोड़ आरक्षित टिकटों में से 89 प्रतिशत (57.90 करोड़ टिकट) ऑनलाइन बुक किए गए, जो यह साबित करता है कि भारतीय रेल यात्री अब पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं।
क्लाउड-आधारित Next-Gen PRS: क्षमता में अभूतपूर्व उछाल
दैनिक यात्रियों की संख्या और तत्काल आरक्षण के समय सर्वर पर पड़ने वाले भारी दबाव से निपटने के लिए भारतीय रेलवे अपने पुरानी प्रणाली को क्लाउड-आधारित अगली पीढ़ी के PRS में अपग्रेड कर रही है। रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) द्वारा तैयार की जा रही यह नई व्यवस्था रेलवे टिकटिंग की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी:
- टिकट बुकिंग क्षमता: मौजूदा 32,000 टिकट प्रति मिनट से बढ़कर 1.5 लाख से अधिक टिकट प्रति मिनट।
- इन्क्वायरी क्षमता: मौजूदा 4 लाख पूछताछ प्रति मिनट से बढ़कर 40 लाख से अधिक पूछताछ प्रति मिनट।
- सुविधाएँ: बहुभाषी, उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस और IRCTC के नए बीटा वर्जन (जुलाई 2026) के साथ निर्बाध एकीकरण।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जुलाई 2025 से आधार-प्रमाणीकृत तत्काल बुकिंग शुरू की गई और फर्जी बोट्स तथा अनधिकृत एजेंटों को रोकने के लिए ओटीपी सत्यापन जोड़ा गया।
AI और डिजिटल सेवाओं से लैस भविष्य का रेल नेटवर्क
रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) ने यात्रियों की सुविधा और रेलवे परिचालन के लिए कई एकीकृत प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं:
- रेलवन (RailOne) ऐप: जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए इस ऐप के 4.55 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। इसमें एआई (AI) आधारित ‘वेटिंग लिस्ट पुष्टिकरण भविष्यवाणी’ फीचर है, जिसकी सटीक अनुमान लगाने की क्षमता 53% से बढ़कर 94% हो गई है।
- अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्म: अनारक्षित टिकटों के लिए UTS, रीयल-टाइम रनिंग स्टेटस के लिए NTES, शिकायत निवारण के लिए रेलमदद (हल दर 99.9% से अधिक), और माल ढुलाई के लिए FOIS जैसे सिस्टम रेलवे को स्मार्ट बना रहे हैं।
इसके अलावा, भारतीय रेलवे अब ट्रेन रूट्स के ऑप्टिमाइजेशन, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और ऊर्जा खपत का पूर्वानुमान लगाने के लिए ब्लॉकचेन, IoT और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों को अपना रही है।
FAQ
प्रश्न 1: भारतीय रेलवे की यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS) की शुरुआत कब हुई थी और इसका मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: PRS की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। यह भारतीय रेलवे का कंप्यूटरीकृत प्लेटफॉर्म है जो आरक्षित टिकटों की बुकिंग, संशोधन, रद्द करने, सीट आवंटन, वेटिंग लिस्ट/RAC प्रबंधन और आरक्षण चार्ट तैयार करने का कार्य संभालता है।
प्रश्न 2: आगामी क्लाउड-बेस्ड (Next-Gen) PRS की मुख्य क्षमताएँ क्या हैं?
उत्तर: नया PRS प्रति मिनट 1.5 लाख से अधिक टिकट बुक करने और 40 लाख से अधिक पूछताछ संभालने में सक्षम होगा। इसके अलावा यह बहुभाषी और अधिक सुरक्षित इंटरफ़ेस प्रदान करेगा।
प्रश्न 3: रेलवन (RailOne) ऐप का एआई (AI) फीचर यात्रियों के लिए कैसे मददगार है?
उत्तर: RailOne ऐप में एआई-आधारित ‘वेटिंग लिस्ट पुष्टिकरण भविष्यवाणी’ फीचर दिया गया है, जो टिकट बुक करते समय 94% सटीकता के साथ यह बताता है कि वेटिंग टिकट कन्फर्म होगा या नहीं।
प्रश्न 4: CRIS क्या है और भारतीय रेलवे में इसकी क्या भूमिका है?
उत्तर: CRIS (Centre for Railway Information Systems) 1986 में स्थापित एक संस्थान है, जो भारतीय रेलवे के IT इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे PRS, UTS, NTES, FOIS आदि) का निर्माण, विकास और रखरखाव करता है।
प्रश्न 5: तत्काल टिकट बुकिंग में पारदर्शिता लाने के लिए रेलवे ने हाल ही में क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: जुलाई 2025 से तत्काल बुकिंग के लिए आधार-आधारित प्रमाणीकरण लागू किया गया, और स्वचालित बोट्स व अनधिकृत एजेंटों को रोकने के लिए ओटीपी (OTP) सत्यापन प्रक्रिया जोड़ी गई है।


