हरियाली अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे पूजा और दीपक जलाती महिला
हरियाली अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा और दीप प्रज्ज्वलन की धार्मिक परंपरा।

Hariyali Amavasya Katha: सावन माह की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। चारों ओर फैली हरियाली के कारण इसे यह नाम मिला है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन स्नान, दान, ध्यान और पौधे लगाने का विशेष महत्व है।

माना जाता है कि हरियाली अमावस्या पर पौधे लगाने से घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि आती है। ज्योतिषियों के मुताबिक, इस दिन हरियाली अमावस्या की कथा सुनना भी विशेष माना जाता है।

हरियाली अमावस्या की पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, एक राज्य के राजा की बहू ने एक दिन छुपकर मिठाई खा ली। इसके बाद उसने मिठाई खाने का आरोप घर के चूहे पर लगा दिया। चूहा गुस्सा हो गया और बदला लेने की ठान ली।

जब घर में मेहमान ठहरे, तब चूहे ने बहू की साड़ी उठाकर राजा के कमरे में रख दी। सुबह राजा ने साड़ी देखी तो बहू को ही दोषी मान लिया। राजा ने उसे महल से बाहर निकाल दिया।

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महल से बाहर आने के बाद बहू पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगी। वह हर शाम वहां दीपक जलाती। ज्वार उगाती और लोगों को गुड़धानी का प्रसाद बांटती थी।

एक रात राजा के सैनिकों ने पीपल के पेड़ के नीचे जल रहे दीपकों को आपस में बात करते सुना। सैनिकों ने जब उनसे पूछा तो बहू के दीपक ने पूरी सच्चाई बता दी।

दीपक ने बताया कि मिठाई बहू ने ही खाई थी, लेकिन उसकी साड़ी चूहे ने राजा के कमरे में रखी थी। बहू इस मामले में निर्दोष थी।

सैनिकों से पूरी बात सुनने के बाद राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने बहू को आदरपूर्वक वापस महल बुला लिया। इसके बाद सभी खुशी-खुशी रहने लगे।

हरियाली अमावस्या की पूजन विधि

हरियाली अमावस्या के दिन सुबह पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और मंदिर में दीपक जलाएं। सुहागिन महिलाएं लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए हरी चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी बांटती हैं। इसके बाद पीपल और तुलसी के पौधे की पूजा कर उनकी परिक्रमा की जाती है। इस दिन मालपुए का भोग लगाना शुभ माना जाता है। पितरों की शांति के लिए दान-पुण्य और तर्पण भी किया जाता है। हरियाली अमावस्या पर नए पौधे लगाने का भी विशेष महत्व बताया गया है। पर्यावरण सुरक्षा और जीवन में शांति-समृद्धि की कामना के लिए इस दिन पौधे लगाने की परंपरा है।

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5 FAQs

1. हरियाली अमावस्या किसे कहा जाता है?
सावन माह की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। चारों ओर फैली हरियाली के कारण इसे यह नाम मिला है।

2. हरियाली अमावस्या पर क्या करना चाहिए?
इस दिन स्नान, दान, ध्यान, पूजा, तर्पण और पौधरोपण करने का विशेष महत्व बताया गया है।

3. हरियाली अमावस्या पर किन पौधों की पूजा की जाती है?
इस दिन पीपल और तुलसी के पौधे की पूजा कर परिक्रमा करने की परंपरा है।

4. हरियाली अमावस्या पर कौन सा भोग लगाया जाता है?
इस दिन मालपुए का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

5. हरियाली अमावस्या की कथा में बहू को महल से क्यों निकाला गया था?
राजा ने बहू की साड़ी अपने कमरे में देखकर उसे दोषी मान लिया था। बाद में सैनिकों को दीपक से पूरी सच्चाई पता चली और राजा को अपनी भूल का अहसास हुआ।