MP News: मध्य प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए गए प्रदेशव्यापी जांच अभियान में मिलावट का बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य भर से 20 जुलाई से 10 अगस्त तक एकत्र किए गए कुल 2,234 नमूनों में से 73 खाद्य सैंपल प्रयोगशाला जांच में फेल पाए गए हैं। इनमें सबसे चिंताजनक रिपोर्ट देशी घी की आई है, जहां भोपाल के 13 और इंदौर के 8 घी के नमूने स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह असुरक्षित घोषित किए गए हैं। इस बड़ी गड़बड़ी के सामने आने के बाद आम नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे लोगों के लिए बाजार से खरीदे गए घी की शुद्धता जांचना बेहद जरूरी हो गया है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से चलाए गए इस तीन सप्ताह के विशेष चेकिंग अभियान के दौरान राज्य के सभी प्रमुख शहरों से दूध, पनीर, मावा और देशी घी के सैंपल एकत्र किए गए थे। लैब टेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, कुल 73 अमानक सैंपलों में राजधानी भोपाल और व्यावसायिक राजधानी इंदौर से लिए गए नामी ब्रांड्स व स्थानीय डेयरी के घी के नमूनों में रिफाइंड तेल, वनस्पति और हानिकारक रसायनों की मौजूदगी पाई गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह अमानक और मिलावटी घी सीधे तौर पर मानव शरीर में पाचन तंत्र, यकृत और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
मध्य प्रदेश में त्योहारों और मानसूनी सीजन के दौरान दुग्ध उत्पादों में मिलावटखोरी का कारोबार नया नहीं है। इससे पहले भी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में नकली मावा और सिंथेटिक दूध बनाने वाली अवैध इकाइयों पर छापे मारे थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, जहां असली देशी घी हड्डियों को मजबूत बनाने, याददाश्त सुधारने और शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है, वहीं वनस्पति या केमिकल युक्त नकली घी का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर दिल के दौरों का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है। यही वजह है कि राज्य सरकार समय-समय पर ऐसे विशेष अभियान चलाकर मिलावटखोरों पर नकेल कसने का प्रयास करती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने क्या कहा ?
मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जिन ब्रांडों और डेयरियों के नमूने अमानक पाए गए हैं, उन्हें नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि आरोपी विक्रेताओं और निर्माताओं के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा। इसके साथ ही विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की संदिग्ध बिक्री की सूचना तुरंत खाद्य विभाग के टोल-फ्री नंबर या शिकायत केंद्र पर दर्ज कराएं ताकि त्वरित छापेमारी की जा सके।
आम जनता में डर का माहौल
इस खुलासे का सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की सेहत और उनकी जेब पर असर पड़ रहा है। बाजार में शुद्धता के नाम पर ऊंचे दामों में बिकने वाला घी यदि सेहत बिगाड़ने लगे, तो इससे जनमानस में डर का माहौल बनना स्वाभाविक है। हालांकि, उपभोक्ता सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सजगता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि नागरिक खरीदारी के समय सीलबंद पैकिंग, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर जांचें और संदेह होने पर घर पर ही साधारण परीक्षण करें, तो मिलावटी खानपान के खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है।
घरेलू तरीकों से ऐसे करें असली और मिलावटी घी की पहचान
यदि आप भी बाजार से खरीदे गए देशी घी की शुद्धता को लेकर आशंकित हैं, तो घर की रसोई में मौजूद साधारण चीजों की मदद से इन 3 आसान तरीकों से असली और नकली घी का फर्क पहचान सकते हैं:
पहला तरीका: फ्रीजर टेस्ट (Freezer Test)
- एक बर्तन में थोड़ा सा घी निकालकर उसे आंच पर पिघला लें।
- अब इस पिघले हुए घी को कांच के एक साफ गिलास में डालें।
- इस गिलास को कुछ समय के लिए फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें।
- ठंडा होने के बाद गिलास को ध्यान से देखें। यदि घी के जमने पर उसके ऊपर एक अलग अलग-थलग परत बनी हुई दिखाई दे, तो वह घी सही और शुद्ध माना जाता है।
दूसरा तरीका: वाटर टेस्ट (Water Test)
- एक कांच का गिलास लें और उसे साधारण पानी से भर लें।
- अब इस पानी वाले गिलास में एक चम्मच घी डालें।
- ध्यान से देखें कि क्या घी पानी के नीचे तले में बैठ रहा है? यदि घी नीचे बैठ जाता है, तो वह अशुद्ध या मिलावटी है।
- असली और शुद्ध देशी घी हमेशा पानी की ऊपरी सतह पर तैरता रहता है।
तीसरा तरीका: हाइड्रोक्लोरिक एसिड टेस्ट (Chemical Test)
- एक बर्तन में लगभग 2 चम्मच घी लें।
- इसमें आधा चम्मच साधारण नमक मिलाएं।
- अब इस मिश्रण में लगभग दो बूंद हाइड्रोक्लोरिक एसिड (Hydrochloric Acid) की डालें और सभी को आपस में अच्छी तरह मिला दें।
- इस मिश्रण को लगभग 20 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें।
- 20 मिनट बाद मिश्रण के रंग की जांच करें। यदि मिश्रण का रंग नहीं बदलता है, तो घी शुद्ध है। यदि इसका रंग बदलकर गुलाबी या लाल हो जाता है, तो घी में मिलावट की गई है।
नोट: यह जानकारी सामान्य परीक्षणों और जनहित में जारी दिशा-निर्देशों पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या संदेह की स्थिति में विशेषज्ञ या खाद्य विश्लेषक से परामर्श अवश्य लें।


