Nag Panchami Rules: सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर नाग देवता की विशेष पूजा की जाती है।
प्राचीन मान्यताओं और लोक परंपराओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन रसोई घर में चूल्हे पर सीधा तवा या कड़ाही चढ़ाना और उस पर रोटी पकाना या तलना-भूनना सख्त वर्जित माना गया है।
तवे की आकृति और राहु-केतु दोष का ज्योतिषीय संबंध
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तवे की बनावट नाग के फण के समान मानी जाती है। नाग पंचमी का दिन नाग देवों को तृप्त और शांत करने का होता है, इसलिए गर्म तवे पर भोजन पकाना नाग रूप को कष्ट देने के समान माना गया है। मान्यता है कि इस दिन तवा चढ़ाने से घर में राहु और केतु का दोष उत्पन्न होता है, जिससे मानसिक अशांति और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से इस दिन तवे की रोटी की जगह कड़ाही में पूड़ी, हलवा या बासी/सात्विक पकवान बनाने की परंपरा है।
नाग पंचमी के दिन भूलकर भी न करें ये 3 काम
जमीन की खुदाई न करें: पाताल और मिट्टी में नागों का वास माना जाता है। इस दिन खुदाई करने से नागों को चोट पहुँच सकती है, जिससे दोष लगता है।
धारदार चीजों का प्रयोग न करें: सुई-धागे का इस्तेमाल, चाकू से सब्जी काटना या कैंची चलाना इस दिन अशुभ माना जाता है।
तामसिक भोजन से दूरी बनाएं: नाग पंचमी पर पूर्णतः सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। किसी से वाद-विवाद या मन में नकारात्मक विचार लाने से बचें।
(FAQs)
प्र.1: नाग पंचमी के दिन तवे पर रोटी बनाना क्यों मना होता है?
उ.: तवे की आकृति नाग के फण जैसी मानी जाती है। गर्म तवे पर रोटी पकाने से नाग देवता को कष्ट पहुँचने और राहु-केतु दोष लगने की मान्यता है।
प्र.2: नाग पंचमी पर रोटी के बजाय क्या पकाने की परंपरा है?
उ.: इस दिन तवे पर रोटी बनाने के बजाय पूड़ी, हलवा या कड़ाही में बनने वाले अन्य सात्विक पकवान बनाए जाते हैं।
प्र.3: नाग पंचमी पर जमीन की खुदाई क्यों नहीं करनी चाहिए?
उ.: मिट्टी और पाताल में नागों का वास होता है, इसलिए खुदाई करने से उन्हें चोट पहुँचने का भय रहता है।
प्र.4: नाग पंचमी के दिन किन-किन चीजों के इस्तेमाल से बचना चाहिए?
उ.: इस दिन सुई-धागा, चाकू, कैंची जैसी नुकीली और धारदार वस्तुओं के इस्तेमाल से बचना चाहिए।
प्र.5: नाग पंचमी पर किस प्रकार का भोजन करना चाहिए?
उ.: नाग पंचमी के दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज) का त्याग कर केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।


